
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। पहले सरकारों को लाठी गोली और दमन की सरकार, तानाशाह आदि कहा जाता था, लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद “बुलडोजर राज” नया राजनीतिक शब्द बन गया। जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां बुलडोजर मशीन नहीं बल्कि शासन का प्रतीक बन चुका है। यह लोकतंत्र और संविधान के लिए खतरनाक स्थिति है।
बंगाल में भी बुलडोजर संस्कृति लागू :
भाकपा (माले) द्वारा समस्तीपुर के कर्पूरी सभागार में “बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज” विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, बिहार के बाद बंगाल में हालिया संपन्न चुनाव परिणामों ने लोगों को चौंकाया है और अब वहां भी बुलडोजर संस्कृति लागू की जा रही है।
माल्यार्पण :
बताते चलें कि, प्रख्यात भाकपा नेता कॉ. रामदेव वर्मा की स्मृति में उनके 35 वें स्मृति दिवस पर उक्त सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, नौजवान, छात्र, महिलाएं और लोकतंत्र पसंद नागरिक शामिल हुए। इसके पुर्व शहर स्थित शहीद-ए-आजम भगत सिंह, भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर और जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया।
बड़ी कंपनियों के लिए बनाया जा रहा रास्ता :
सेमिनार को संबोधित करते हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि, चुनाव के पहले बंगाल में झाल–मुड़ी की चर्चा थी, अब रेलवे स्टेशन के पास छोटे-छोटे झाल–मुड़ी और चाय दुकानदारों को उजाड़ने की खबरें चर्चा में हैं। इसका मतलब साफ है कि, छोटे दुकानदारों और गरीब मेहनतकशों की रोजी-रोटी खत्म कर बड़ी कंपनियों के लिए रास्ता बनाया जा रहा है।
छोटे दुकानदारों को खत्म कर कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने की साजिश :
उन्होंने कहा कि यह हमला केवल दुकानों पर नहीं, बल्कि गरीबों की जिंदगी और आत्मनिर्भरता पर हमला है। बंगाल में बकरीद में बीफ़ के छोटे व्यापारियों पर पाबंदी और लाइसेंस के नाम पर नियंत्रण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति छोटे दुकानदारों को खत्म कर कॉरपोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने की साजिश है।
बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई :
संबोधन के क्रम में वरिष्ठ वाम नेता कॉ. रामदेव वर्मा को याद करते हुए कहा कि, बीच के पांच वर्षों को छोड़कर 1980 से 2010 तक वे विधायक रहे और हर दौर में गरीबों, दलितों, वंचितों और मेहनतकश जनता की आवाज बनकर संघर्ष करते रहे। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े राजनीतिक बदलावों के बावजूद रामदेव वर्मा ने कभी जनता का साथ नहीं छोड़ा और आज उनके संघर्षों की विरासत बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई को दिशा दे रही है।
विरोधियों के खिलाफ बुलडोजर और एनकाउंटर :
माले महासचिव कॉ. भट्टाचार्य ने कहा कि, झूठ और फरेब मौजूदा सरकार के रगों में खून बन कर दौड़ रहा है। पहले कहा गया कि, बुलडोजर अपराधियों और माफियाओं पर चलेगा, लेकिन अब बिना न्यायिक प्रक्रिया के किसी को भी अपराधी घोषित कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि, न्यायपालिका विवश है, सत्ता अपने विरोधियों के खिलाफ बुलडोजर और एनकाउंटर की राजनीति चला रही है। बांग्लादेशी, अतिक्रमणकारी या देश विरोधी कहकर गरीबों, आदिवासियों, मुसलमानों, किसानों और विरोध की आवाजों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज डिग्रियां मिल रही हैं लेकिन स्थायी रोजगार खत्म हो रहे हैं। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों के सवाल राष्ट्रीय बहस से गायब हैं। उन्होंने कहा कि कभी पेट्रोल 40 रुपये होने के वादे किए जाते थे, लेकिन आज उसकी कीमत आसमान छू रही है, रुपया लगातार गिर रहा है और रसोई गैस गरीबों की पहुंच से बाहर हो गई है। मजदूरी और अधिकार की मांग करने वालों को जेल में डाला जा रहा है।
जनता की आवाज को संगठित करने की जरूरत :
उन्होंने भाजपा पर बलात्कारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीट छात्रा को अब तक न्याय नहीं मिला। लेबर कोड, अंबानी-अडानी केंद्रित नीतियों और टाउनशिप परियोजनाओं के जरिए गरीबों को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। बिना उचित मुआवजे के जमीन अधिग्रहण की कोशिशें तेज हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सबके खिलाफ जनता की व्यापक आवाज को संगठित करना होगा। इस क्रम में उन्होंने मनरेगा कानून को खत्म करने और कैंपस में जाति भेदभाव को खत्म करने के लिए रोहित एक्ट की तर्ज पर कानून बनाने की मांग की।
विधान पार्षद शशि यादव ने कहा :
सेमिनार को संबोधित करते हुए विधान परिषद सदस्य कॉ. शशि यादव ने कहा कि, हम सब संकल्प लेते हैं कि कॉ. वर्मा के बताए रास्ते पर आगे बढ़ते हुए संघर्ष की विरासत को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा बिहार में बुलडोजर राज को सफल नहीं होने देंगे। उन्होंने महिला आरक्षण को अविलंब लागू करने की मांग की तथा पक्षपात पूर्ण परिसीमन और महिलाओं-छात्राओं पर बढ़ती हिंसा की आलोचना की।
पूर्व विधायक मंजू प्रकाश ने कहा :
पूर्व विधायक और केंद्रीय कमिटी सदस्य कॉ. मंजू प्रकाश ने कहा कि नई पीढ़ी को रामदेव वर्मा के संघर्षों से सीखने की जरूरत है। गरीबों को बसाने के लिए बने समस्तीपुर के सुन्दराइया नगर, को बुलडोजर से उजाड़ दिया गया। पार्टी इस बस्ती को फिर से बसाने की लड़ाई लड़ेगी।
धीरेन्द्र झा ने कहा :
मिथिलांचल प्रभारी कॉ. धीरेंद्र झा ने कहा कि, “रामदेव वर्मा की विरासत जनता के प्रतिरोध और सांप्रदायिकता विरोधी संघर्ष की विरासत है। उसी के अनुरूप जयमंगला गढ़ से लेकर उजियारपुर और मुसरीघरारी तक पार्टी कार्यकर्ताओं ने मॉब लिंचिंग, हत्या और अन्याय के खिलाफ लगातार संघर्ष किया है। अपने संबोधन में कॉ. झा ने समाजवादियों और कम्युनिस्टों की व्यापक एकजुटता को समय की मांग बताया।
स्मृति द्वार का शिलान्यास :
इसके पहले, भाकपा माले नेताओं ने जिले के पतेलिया गांव स्थित का. रामदेव वर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी अवसर पर विधान पार्षद शशि यादव के विधान परिषद मद से बनने वाले “कॉ. रामदेव वर्मा स्मृति द्वार” का शिलान्यास भी किया गया।

उपस्थिति :
कार्यक्रम में प्रो. सुरेंद्र सुमन, वंदना सिंह, डॉ. प्रभात कुमार, रंजीत राम, फूल बाबू सिंह, ललन कुमार, जीबछ पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अजय कुमार, अमित कुमार, दिनेश कुमार, महावीर पोद्दार, लोकेश राज, दीपक यदुवंशी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव प्रो० उमेश कुमार ने किया।