
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। शहर के चीनी मिल परिसर स्थित अपोलो डेंटल के सभागार में वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शरीर के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग मुंह के रख–रखाव पर आधारित ओरल केयर जागरूकता को लेकर के स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।
दांतों और मसूड़ों की बीमारियों को रोकना :
शिविर की अध्यक्षता करते हुए अपोलो डेंटल के निदेशक प्रमुख डॉ ज्ञानेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि, “वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे (विश्व मुख स्वास्थ्य दिवस) हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ओरल हाइजीन (मुंह की सफाई) के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना तथा, दांतों व मसूड़ों की बीमारियों को रोकना है।”
ओरल स्वास्थ्य और समग्र शारीरिक/मानसिक स्वास्थ्य के बीच सम्बन्ध :
उन्होंने बताया कि, “यह दिन बेहतर ओरल हेल्थ के लिए ओरल स्वास्थ्य और समग्र शारीरिक/मानसिक स्वास्थ्य के बीच के संबंध को रेखांकित करता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य मुंह की स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना है, क्योंकि हमारा स्वास्थ्य हमारे पाचन तंत्र पर निर्भर होता है और मुंह पाचन तंत्र प्रारंभिक एवं प्रमुख अंग है।
ओरल हेल्थ के प्रति करते हैं जागरूक :
डॉ. ज्ञानेन्द्र ने कहा कि, “खराब ओरल हेल्थ का नकारात्मक प्रभाव सबसे पहले हमारे पाचन तंत्र पर ही पड़ता है और इसी कारण दिल की बीमारी, डायबिटीज और श्वसन, किडनी, लिवर आदि संबंधी समस्याओं की शुरुआत होती है। आज के दिन हम दांतों में कैविटी, सेंसिटिविटी, मसूड़ों की बीमारियों को रोकने और ओरल हेल्थ के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं।”
खुश मुख खुशहाल जीवन :
इसी क्रम में अपोलो रेंटल के चिकित्सक डॉ दयानंद कुमार ने कहा कि, स्वास्थ्य और मुंह के अंतरंग संबंध को चिन्हित करते हुए हर वर्ष अलग अलग थीम पर यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष ओरल हेल्थ डे 2026 का थीम खुश मुख खुशहाल जीवन” रखा गया है। यह दिन लोगों को जागरूकता सही ब्रश करने, चीनी का सेवन कम करने और नियमित रूप से दंत चिकित्सक से जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करता है।
नियमित रूप से करवाएं डेंटल चेकअप :
डॉ दयानंद ने कहा कि, मुंह को स्वास्थ रखने के लिए दिन में दो बार ब्रश करें, मीठे, खट्टे, व ठंडे पदार्थों का सेवन कम करें तथा तंबाकू आदि का उपयोग करने से परहेज करें। साथ ही समय–समय पर नियमित रूप से डेंटल चेकअप करवाएं। इस शिविर में डॉ फारूक आजमी, डॉ प्रभात रंजन, डॉ मोहन आनंद, धर्मदेव यादव, सतीश कुमार, शबनम कुमारी, शिवम् कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।