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    Home » मौसम पूर्वानुमान पर रखें नजर, सुझावों पर करें अमल: डॉ ए सत्तार

    मौसम पूर्वानुमान पर रखें नजर, सुझावों पर करें अमल: डॉ ए सत्तार

    Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar23/12/2025Updated:23/12/2025No Comments4 Mins Read
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    हल चलाता किसान।

    ओईनी न्यूज नेटवर्क।

    Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। निम्न तापमान के कारण प्रचण्ड ठंड एवं कोहरे की स्थिति में फसलों में पाला एवं अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है। अतः किसान भाई मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान दें, सुझावों पर अमल करें और सावधानी पूर्वक आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई या दावा का छिड़काव करें।

    कोहरा छूटने के बाद ही दवाओं का छिड़काव करें तथा फसलों की नियमित निगरानी रखें। डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मौसम वैज्ञानिक ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के नोडल ऑफिसर डॉ अब्दुल सत्तार ने ठंड से राहत के आसार नहीं दिखने पर किसान भाइयों के लिए जारी सुझाव में उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि पशुओं को ठंड से बचाने के लिए खुले में न रखें और पशुशाला में आवश्यक गर्मी, उचित बिछावन व आहार का प्रबंध करें।

    रबी फसलों में समय पर निकाई-गुडाई करें तथा आवश्यकता अनुसार सिंचाई करें। रबी मक्का की 50-55 दिन की अवस्था में 60 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन कर मिट्टी चढ़ाएँ एवं सिंचाई करें। फसलों में कीट एवं रोग-व्याधियों की नियमित निगरानी करते रहें।

    पहली सिंचाई के बाद गेहूं की फसल में बुआई के 30-35 दिनों की अवस्था पर विभिन्न प्रकार के खरपतवार उग आते हैं. जो तेजी से बढ़कर गेहूँ की बढ़वार एवं उपज को प्रभावित करते हैं। इनके नियंत्रण हेतु सल्फोसल्पयूरॉन 33 ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा मेटसल्पयूरॉन 20 ग्राम प्रति हेक्टेयर को 500 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में छिड़काव करें।

    गेहूँ की पिछात किस्मों की बुआई अविलंब पूर्ण करें। इस क्षेत्र के लिए एचडी-2733, एचयूडब्ल्यू-468, डब्ल्यूआर-544, डीबीडब्ल्यू-39, एचडी-2967 एवं एचडब्ल्यू-2045 किस्में अनुशंसित हैं। बीज को पहले 2.5 ग्राम बेविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें, तत्पश्चात क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी की 8 मिली मात्रा प्रति किलोग्राम बीज से उपचार करें। बुआई पूर्व खेत की तैयारी के समय 40 किलोग्राम नत्रजन 40 किलोग्राम फारफोरस एवं 20 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें। जिन क्षेत्रों में जिंक की कमी के लक्षण दिखाई देते हों, वहाँ अंतिम जुताई के समय 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। छिटकवीं विधि से बुआई के लिए 150 किलोग्राम तथा सीड ड्रिल से पंक्तियों में बुआई के लिए 125 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें। बुआई से पूर्व हल्की सिंचाई अवश्य करें ताकि बीजों का अच्छा जमाव हो सके।

    टमाटर की फसल में फल छेदक कीट की नियमित निगरानी करें। इसके पिल्लू कच्चे एवं पके फलों में छेद कर अंदर का गूदा खाते हैं, जिससे सदन एवं उत्पादन में कमी आती है। नियंत्रण हेतु प्रति हेक्टेयर 8-10 फेरोमोन ट्रैप लगाएँ। ब्यूवेरिया बेसियाना जैविक कीटनाशी का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिडकाव करें। कीट प्रकोप अधिक होने पर स्पिनोसेड 48 ईसी 1 मिली प्रति 4 लीटर पानी या इन्डोक्साकार्ब 14.5 एससी 1 मिली प्रति 2.5 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

    आलू की फसल में खरपतवार निकालें तथा 10-15 दिन के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। कजरा पिल्लू दिखाई देने पर क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी की 2.5 लीटर मात्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।

    सब्जी फसलों में नियमित निकाई-गुड़ाई एवं आवश्यकतानुसार सिंचाई करें तथा कीट रोगों की निगरानी रखें। मटर की फसल में अच्छे फलन हेतु 2 प्रतिशत यूरिया घोल का छिडकाव करें। मटर में चूर्णिल फफूंदी (पाउडरी मिल्वधू) रोग एवं फल छेदक कीट की निगरानी विशेष रूप से करें। प्याज की रोपाई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेमी तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें।

    पशुओं को बिछावन के लिए सूखी घास या रावख का प्रयोग करें। दुग्धारू पशुओं को लिवर फ्लूक संक्रमण से बचाव हेतु धान का पुआल न खिलाएँ। यदि पशुओं में दस्त या निचले जबड़े में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें तो ट्राइकलाबेन्डाजोल दवा का प्रयोग करें।

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    Dr A Sattar Dr Gulab Singh Dr Rajendr Prasad Central Agricultural University Pusa
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