
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर । केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी को कम करने की घोषणा के बाद महा बचत उत्सव मनाया जा रहा है। पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के इस फैसले को गरीबों के हित में लिया गया बडा फैसला बततो हुए दोनों नेताओं को गरीबों के मसीहा के रूप में स्थापित करने का दौर चल पडा है। मगर यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है कि बचत किसका उत्सव कौन मनाये।
आज से सात साल पुर्व जीएसटी लागू कर बाद में संशोधन के बहाने आटाए दूधए दूध उत्पाद सहित तमाम रोजमर्रा की चीजों को जीएसटी के दायरे में ला दिया गया था। अब जब कि कई राज्यों में चुनाव है तब सरकार ने अचानक जीएसटी की नई दरें लागू कर दी और कहा गया 22 सितंबर से ये प्रभावी होंगी।
नई दर लागू हुए आज तीसरा दिन है। लेकिन सूरते हाल यह है कि अभी भी कई चीजों पर इसका लाभ फिलहाल उपभोक्ता को नहीं मिल रहा है। रसोई गैस, दवायें दूध, दूध उत्पाद सहित रोजमर्रा की चीजों पर आज भी उपभोक्ता को पुराना मुल्य ही देना पड रहा है।
थोक विक्रेता हो या खुदरा विक्रेता इनका कहना है कि जीएसटी कम किया गया है। किन्तु जो सामान स्टाॅॅक में है उसका जीएसटी हम दे चुके हैं तो कम कीमत पर कैसे बेच सकते हैं। नये मुल्य से नया स्टाॅक आने के बाद ही नये दर पर लोगों को सामान उपलब्ध कराया जायेगा। रसोई गैस आज भी 935 रूपये में बिक रहा है। दूध उत्पादों की भी यही कहानी है वे भी अपने पुराने दामों पर ही बिक रहे हैं।
सुधा दुकानों में पहले भी 85 रुपए में 200 ग्राम पनीर मिलता था और 205 रुपए में आधा किलो पनीर मिलता था। आज भी यही मुल्य लिया जा रहा है। सुधा गाय का दूध 54 रुपए एवं टोंड मिल्क 57 रुपए में दिया जाता है।
इस बाबत सुधा के एक विक्रेता ने बताया कि दूध पनीर एवं मिठाईयों की कीमत में उपर से ही दाम कम नहीं किया गया तो हम क्या करें। हमें प्रत्येक उत्पाद अंकित मुल्य पर ही बेचना होता है। नया दर उपर से लागू होगा तो हम भी कम कीमत पर देंगे।
हलांकि इस बाबत पूछे जाने पर मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के एमडी आरके झा ने बताया कि सुधा के 17 उत्पादों पर जीएसटी के कम होने से दर में परिवर्तन किया गया है।
किंतु सुधा डेयरी के एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर संवाददाता को बताया कि दूध एवं दूध उत्पादों का मुल्य मुख्यमंत्री की सहमति से पटना कम्फेड द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसमें सुधा डेयरी या मिथिला दुग्ध उत्पादक संघ का कोई दखल नहीं होता है। कम्फेड सभी उत्पादों के मुल्य का पुनर्निधारण करेगा तभी उपभोक्ताओं को जीएसटी में कमी का लाभ मिल सकेगा।