
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क पुड्डुचेरी । भाषा निर्विवाद रूप से सहज एवं सरल भावाभिव्यक्ति का माध्यम है। लालित्य व सौंदर्य के साथ-साथ सटीक अभिव्यक्ति के दृष्टि से पूरे देश में समझी जाने वाली भाषा हिन्दी भाषा के मूल उद्देश्य सहज, एवं सरल भावाभिव्यक्ति के सर्वाधिक करीब है। हलांकि कथित रूप से राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त हिन्दी राजभाषा भी बन गयी परन्तु आज भी यह सिर्फ इश्तिहारों, फाईलों व घोषणाओं में ही सिमटी है। दक्षिण भारत के प्रमुख प्रतिष्ठित संस्थान पांडुचेरी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में हिन्दी दिवस पर आयोजित हिन्दी के विविध आयाम विषय पर केन्द्रित एक व्याख्यान माला के दौरान समस्तीपुर के उजियारपुर निवासी प्रो पीके झा प्रेम ने अपने संबोधन के दौरान उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि निःसंकोच सर्व स्वीकृति नहीं मिलने के कारण हिन्दी न तो सर्व स्वीकार्य राष्ट्रभाषा बन सकी न ही सर्व स्वीकार्य राजभाषा के रूप में स्थापित हो सकी।। देश भर में मातृभाषा के रूप में इसका प्रतिष्ठित व सर्व स्वीकार्य होना तो मौजूदा हालात में कपोल कल्पना ही है।
प्रो पीके झा प्रेम ने कहा कि आज दक्षिण भारत में भी लोग अच्छी तरह हिन्दी बोलते और समझते हैं। इसलिए चरण बद्ध तरीके से हम सबों को अपनी-अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हुए हिन्दी को सर्व स्वीकार्य राष्ट्रभाषा, व राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए समेकित प्रयास करना चाहिए।
अपने उद्बोधन में प्रो प्रेम ने हिन्दी के राष्ट्र भाषा, राज भाषा और मातृभाषा के विविध रूप को स्पष्ट करते हुए कहा कि भाषा भावाभिव्यक्ति का माध्यम होता है। इसे ध्यान में रखते हुए हिन्दी तीनों ही रुप मे सही खड़ा हो, ऐसा पहल हमें भी और सरकार को भी करना चाहिए।
बताते चलें कि दक्षिण भारत के प्रमुख प्रतिष्ठित संस्थान पांडुचेरी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में हिन्दी दिवस पर एक हिन्दी के विविध आयाम विषय पर केन्द्रित एक व्याख्यान माला शृंखला का आयोजन किया गया। विश्व विद्यालय के हिन्दी सभागार में विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पी जयशंकर बाबू की अध्यक्षता में आयोजित प्रथम व्याख्यान माला में देश के अलग-अलग राज्यों से विशिष्ट हिन्दी सेवियों को बुलाया गया था।
जिसमें दिल्ली से प्रवासी संसार के संपादक डॉ राकेश पाण्डेय, दक्षिण भारत तामिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी चेन्नई के महासचिव डॉ ईश्वर करुण, जमशेदपुर झारखंड से कारपोरेट वक्ता डॉ कृष्ण मुरारी झा तथा अपने बिहार से स्वामी चिदात्मन वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान सिमारियाधाम से प्रकाशित पत्रिका अम्बरमणि के प्रबंध संपादक प्रो. पी. के. झा प्रेम शामिल थे।
विभागाध्यक्ष डॉ जयशंकर द्वारा स्वागत संबोधन व विषय प्रवेश के उपरांत विभाग के शोधार्थी एवं स्नातकोत्तर छात्र छात्राओं ने विशिष्ट अतिथि प्रो प्रेम सहित तमाम अतिथियों का वहां के विशिष्ट पुष्प गुच्छ से अभिनन्दन किया।
हिन्दी के समर्थन में मजबूती से तर्कपूर्ण पक्ष रखने केलिए देश ही नहीं दुनिया भर से हिन्दी सेवियों की ओर से प्रो प्रेम को बधाई संदेश मिल रहे हैं।
जिसमें रूस से डॉ संजय कुमार, नेपाल से डॉ रति रमण झा, वाराणसी से डॉ विजय कपूर, डॉ अशोक ज्योति, चेन्नई से प्रणव तिवारी, राजस्थान के झिझनू से महेश आजाद, जयपुर से पल्लवी सिंह चैहान, धनबाद से डॉ प्रमोद झा, जमशेदपुर से डॉ अशोक अविचल तथा नुतन झा, बोकारो से डॉ मिनू झा, कानपुर से डॉ प्रदीप दीक्षित, तेलंगाना से डॉ सत्यवीर जी, पाण्डु चेरी से डॉ किशोर त्रिपाठी बिहार के सिवान से शिव कुमार, पटना से प्रो गणेश प्रसाद सिंह, डॉ निशा मोहन झा, डॉ जयदेव मिश्र, अंजना गुप्ता, रुबी सुनैना, राज किशोर सिंह, समस्तीपुर से अर्जुन प्रसाद सिंह, दलसिंहसराय से कैप्टन वशिष्ठ झा, श्याम कुमार लाल, प्रो प्रमोद कुमार चैधरी, प्रो बिधु भूषण पाण्डेय, डॉ भोला झा, ई मनोहर सिंह, सुशांत चन्द्र मिश्र, प्रो राम बाबू रजक, डॉ राजकुमार, डॉ राहत हुसैन, मो सुलेमान, मुकेश कुमार चैधरी आदि शामिल हैं।