
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर । नशा न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। नशे की लत से युवाओं को कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कुशल उद्यमी कुमारी अपराजिता ने युवाओं पर पड़ने वाले नशे के दुष्प्रभाव के बारे में बताते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के सेवन से 30 से अधिक प्रकार के कैंसर हो सकते हैं। नशा मस्तिष्क के रसायन बदलकर अवसाद, घबराहट और आवेगी व्यवहार को बढ़ाता है। यह निर्णय लेने, सीखने और याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। नशे की लत से परिवारों में झगड़े और अलगाव बढ़ जाते हैं। इससे सामाजिक ताना-बाना भी बिगड़ जाता है और अपराध दर में वृद्धि होती है।
उन्हेांने कहा कि नशे की लत से युवाओं की कार्य क्षमता प्रभावित होती है, जिससे रोजगार के अवसरों और आर्थिक प्रगति पर नकारात्मक असर पड़ता है। सुश्री अपराजिता ने सुझाव देते हुए कहा कि,
परिवार को अपने बच्चों की संगति पर नजर रखनी चाहिए और उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में पता चल सके।युवाओं के लिए स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना चाहिए, जिससे वे नशे की ओर आकर्षित न हों।
कुमारी अपराजिता ने कहा कि नशा उन्मूलन में युवाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना समाज में कोई परिवर्तन मुमकिन नहीं। युवा नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने और नशा मुक्त समाज बनाने में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। युवा सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं, नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैला सकते हैं और लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और नशे के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।