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रत्न शंकर भारद्वाज
ओईनी 24 विद्यापतिनगर । एक माह तक चलने वाले श्रावणी मेले को लेकर भक्त और भगवान की मिलन स्थली विद्यापतिधाम कांवरियों व श्रद्धालुओं के स्वागत में सज-धज कर तैयार है। इस को लेकर मंदिर कमिटी एवं प्रशासन द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
इस क्रम में एक तरफ जहां श्रद्धालुओं की जुटने वाली व्यापक भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और जलाभिषेक में सुविधा के मद्देनजर मंदिर एवं आसपास के क्षेत्र में जगह जगह बैरिकेटिंग, और सीसी कैमरे, भारी मात्रा में सुरक्षा बल एवं एक दर्जन मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में शस्त्र बल तैनात किये गये हैं।
वहीं श्रद्धालुओ की सुविधा के लिए जगह जगह शुद्ध पेयजल, शौचालय, रौशनी के उत्तम प्रबंध, मंदिर के पीछे वाहन स्टैंड की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं केलिए पूजन सामग्री, प्रसाद आदि की दुकाने भी सज गई हैं। वहीं बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले, और महिलाओं केलिए मीना बाजार भी सज गया है। बताते चलें कि सावन माह शरू होते ही श्रावणी मेले को लेकर भक्त और भगवान की नगरी विद्यापतिधाम में प्रतिवर्ष आस्था का सैलाब उमड़ता है।
जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु व कांवरिए निकटवर्ती गंगा के चमथा घाट, झमटिया, सिमरिया, पतसिया, सुल्तानपुर, बुलगानीन घाट धमौन, रसलपुर, जौनापुर आदि घाटों से जल धारण कर पैदल यात्रा करते हुए विद्यापतिधाम पहुंचते हैं और महाकवि विद्यापति के अराध्य उगना महादेव पर जलाभिषेक करते है।
इस बाबत बालेश्वर स्थान विद्यापतिधाम के सदस्यों ने बताया कि जलाभिषेक को लेकर आधी रात से ही श्रद्धलुओं का आना आरंभ हो जायेगा। हर बार की तरह इस वर्ष भी महिला व पुरुषों के लिए अलग- अलग लाइन की व्यवस्था की गई है।
अत्यधिक भीड़ की कल्पना करते हुए सुरक्षा व्यवस्था सहित मंदिर परिसर व आसपास के क्षेत्र के चप्पे चप्पे पर नजर रखने केलिए मंदिर परिसर में ही कंट्रोल रूम बनाया गया है। प्रशासन की ओर से आपात परिस्थिति में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी की गई है।
इस दौरान दलसिंहसराय से मोहिउद्दीननगर की ओर जाने वाले भारी वाहनों के परिचालन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। बजरंगी चैक से मड़वा ढाला कोल्ड स्टोरेज के रास्ते सुभानीपुर होते हुए परिचालन किया जाएगा। मलकलीपुर तीन मोहानी गांव के निकट बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों पर भी दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई है।
विद्यापतिधाम के मुख्य पुजारी कामेश्वर गिरि व अमरनाथ गिरि ने बताया कि कांवड़ यात्रा एक तपस्या है। इसमें भगवान शिव के प्रति प्रेम और श्रद्धा भावना उत्पन्न होती है। श्रावण मास सबसे पवित्र व शुद्ध महीना होता है।
इस महीने में भगवान शिव का वास रहता है। शिव को श्रद्धा व भक्ति अधिक प्रिय होती है। भगवान शंकर भोले अपने भक्तों व कांवड़ लाने वालों शिवभक्तों को सुख-समृद्धि और धन-धान्य, यश – वैभव आदि प्रदान करते हैं।