
Oini News Network
ओईनी 24 बिथान। मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर पूरा विपक्ष उबल रहा है। इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के अलावा राजनीतिक जमीन तलाश रही जनसुराज पार्टी ने भी इस प्रक्रिया पर विरोध जताया है। जनसुराज सुप्रीमो प्रशान्त किशोर ने मतदाता पुनरीक्षण पर कडी आपत्ति दर्ज कराते हुए पीएम से सवाल किया है कि जिन मतदाताओं के वोट के दम पर जीत कर मोदी पीएम बने हैं वे पुनरीक्षण में अवैध हो जायें तो क्या पीएम इस्तीफा दे कर पुन: चुनाव कराने का हिम्मत दिखायेंगे?
श्री किशोर ने पूछा अगर मतदाता अवैध तो उनके वोट से बनी सरकार वैध कैसे?
वहीं हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व राजद विधायक सुनील कुमार पुष्पम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पुनरीक्षण प्रक्रिया को असंवैधानिक और लोकतंत्र में मौलिक अधिकार के विरुद्ध करार देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के लाखों प्रवासी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटने की आशंका अत्यंत गंभीर विषय है और यह लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन है।
पूर्व विधायक ने स्पष्ट किया कि राज्य से बाहर रहकर रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय में संलग्न लाखों बिहारी नागरिकों को अपने राज्य के चुनावों में भागीदारी और मताधिकार का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यदि इन प्रवासी मतदाताओं के नाम बिना किसी पूर्व सूचना अथवा उचित प्रक्रिया के सूची से हटा दिए जाते हैं, तो यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध होगा, बल्कि सामाजिक न्याय की अवधारणा पर भी गहरा प्रहार माने जाएगा।
श्री पुष्पम ने चुनाव आयोग से आग्रह करते हुए कहा कि प्रवासी मतदाताओं की स्थिति को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए और उनके नामों को मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए विशेष उपाय किए जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रवासी अनुकूल बनाया जाए, ताकि देश के दूर-दराज क्षेत्रों में रह रहे प्रवासी नागरिक भी आसानी से अपने नाम की पुष्टि कर सकें।
उन्होंने कहा कि ये प्रवासी नागरिक न केवल अपने परिवारों के लिए, बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था, समाज और विकास प्रक्रिया के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि इनका नाम मतदाता सूची से हटता है तो इससे पूरे चुनावी समीकरण पर असर पड़ेगा और जनविश्वास को भी ठेस पहुंचेगी।
श्री पुष्पम ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रवासी मतदाताओं की उपेक्षा लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने जैसा होगा। जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से संयुक्त रूप से अपील की कि इस मुद्दे पर ठोस रणनीति बनाकर प्रवासी मतदाताओं को मतदाता सूची में यथोचित रूप से शामिल रखा जाए। जिससे उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।