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ओईनी 24 डेस्क समस्तीपुर। हालिया दिनों में अच्छी बारिश के आसार नहीं हैं। इसे देखते हुए डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा मौसम वैज्ञानिक सह जलवायू परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केन्द्र के नोडल ऑफिसर डाॅ अब्दुल सत्तार ने किसान भाईयों केलिए समसामयिक सुझाव जारी कर कहा है कि,
जिन क्षेत्रों में हल्की वर्षा हुई है, वहाँ ऊचॉस जमीन में सुर्यमुखी की बुआई के लिए मौसम अनुकूल है। मोरडेन, सुर्या, सीओ-1 एवं पैराडेविक सुर्यमुखी की उन्नत संकुल के प्रभेद है। जबकि बीएसएच-1, केबीएसएच-1, के० बी०एस०एच०-44 सुर्यमुखी की संकर प्रभेद है। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 100 किवन्टल कम्पोस्ट, 30-40 किलो नेत्रजन, 80-90 किलो स्फुर एवं 40 किलो पोटाश का व्यवहार करें। बुआई के समय किसान 30-40 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार कर सकते है। संकर किस्मों के लिए बीज दर 5 किलोग्राम तथा संकुल के लिए 8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से रखें।
किसानों को सलाह दी जाती है की मिश्रीकंद की बुआई के लिये मौसम अनुकूल है। उंचास जमीन में मिश्रीकंद की बुआई करे। इसका उन्नत प्रभेद राजेंद्र मिश्रीकंद 1 एव राजेंद्र मिश्रीकंद 2 है। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 200 किवन्टल कम्पोस्ट, 80 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरोस, और 80 किलोग्राम पोटाश का व्यवहार करें।
अरहर की बुआई ऊचॉस जमीन में करें। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किलो नेत्रजन, 45 किलो स्फुर, 20 किलो पोटाश तथा 20 किलो सल्फर का व्यवहार करें। बहार, पूसा 9, नरेद्र अरहर 1, मालवीय-13, राजेन्द्र अरहर 1 आदि किस्में बुआई के लिए अनुशसित है। बीज दर 18-20 किलो प्रति हेक्टेयर रखें। बुआई के 24 घंटे पूर्व 2.5 ग्राम थीरम दया से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करे। बुआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए।
जो किसान भाई खरीफ प्याज का बिचड़ा अब तक नहीं गिराये हों, उथली क्यारिओं में यथाशीघ्र नर्सरी गिरावें। नर्सरी में जल निकास की व्यवस्था रखें। एन०-53, एग्रीफाउण्ड डीक रेड, अकी कल्याण, भीमा सुपर खरीफ प्याज के लिए अनुशंसित किस्में है। बीज को कैप्टान या थीरम /2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर बीजोपचार कर लें। पौधशाला को तेज धूप एवं वर्षों से बचाने के लिए 40% छायादार नेट से 6-7 फीट की ऊचाई पर ढ़क सकते है। प्याज के स्वस्थ पौध के लिए पौधशाला से नियमित रूप से खरपतवार को निकालते रहें। कीट-व्याधियों से नर्सरी की निगरानी करते रहें।
लीची के बागों में फलों के तोड़ाई के बाद बागों की सफाई व पेड़ों के उम्र के अनुसार अनुशंसित उर्वरकों का व्यवहार करें, जिससे अगले वर्ष वृक्षों के फलन वृद्धि में सहायक होगा।
पशु चारा के लिए ज्वार, बाजरा तथा मक्का और इसके साथ मेथ, लोबिया तथा राईस बीन की बुआई करें। उचाँस जमीन में बरसाती सब्जियों जैसे भिंडी, लौकी, नेनुआ, करेला, खीरा आदि की बुआई करें।