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गौतम राय।
ओईनी24 बेनीपुर। हिन्दी साहित्य जगत में जनकवि बाबा नागार्जुन प्रगतिशील काव्य धारा की अगुवाई करते रहे। हिन्दी साहित्य के बाबा नागार्जुन मैथिली साहित्य में यात्री नाम से प्रसिद्ध वैद्यनाथ मिश्र की रचनाओं में जनचेतना, मानवीय संवेदना, जन जागरुकता, कुव्यवस्था और अत्याचार के विरुद्ध क्रांति के स्वर गूंजते हैं।
बेनीपुर एसडीएम मनीष कुमार झा ने बाबा नागार्जुन के 115वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह का उद्घाटन करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि बाबा नागार्जुन के साहित्य शोषित, पीड़ित, गरीब-गुरबो के साथ घटित घटना का आईना है।
बताते चलें कि मधुबनी जिले के बेनीपुर अनुमंडल से 15 किलोमीटर उत्तर पश्चिम वैद्यनाथ मिश्र उर्फ यात्री या कहें बाबा नागार्जुन के पैतृक गांव तरौनी में की 115वी जयंती हर्षोल्लास एवं श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस क्रम में सबसे पहले आसपास के स्कूली बच्चों ने अहले सुबह गांव में प्रभात फेरी निकाल कर बाबा नागार्जुन अमर रहे की नारे लगाये।
प्रगतिशील साहित्य के प्रतिनिधि, प्रखर, मुखर व अक्खर साहित्य सेवी, स्वतंत्रता सेनानी जनकवि तरौनी निवासी वैद्यनाथ मिश्र हिंदी और मैथिली साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक और कवि थे। उनका जन्म 30 जून 1911 को हुआ था और 5 नवंबर 1998 को उनका निधन हो गया। वे जनकवि (जनता के कवि) के रूप में जाने जाते थे और प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार थे।
हिन्दी साहित्य के नागार्जुन ने हिंदी के अतिरिक्त मैथिली, संस्कृत और बांग्ला में भी रचनाएँ कीं। उन्होंने मैथिली में ‘यात्री’ उपनाम से लिखा, जो उनके मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र के साथ मिलकर एक-दूसरे का पर्याय बन गया।
नागार्जुन ने न केवल साहित्य में योगदान दिया, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने लंका में भी कुछ समय बिताया और बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। उनकी रचनाओं में सामाजिक न्याय, शोषण के खिलाफ आवाज और आम जनता की पीड़ा को व्यक्त किया गया है। जिसने उन्हें कालजयी बना दिया।
नागार्जुन की प्रमुख कृतियों में ‘युगधारा’, ‘सतरंगे पंखों वाली’, ‘प्यासी पथराई आँखें’, ‘तालाब की मछलियाँ’, और ‘हजार-हजार बाहों वाली’ शामिल हैं।
तदुपरान्त बाबा नागार्जुन पुस्तकालय परिसर में एसडीएम मनीष कुमार झा, प्रखंड प्रमुख चौधरी मुकुंद कुमार राय, बीडीओ प्रवीण कुमार, सीओ अश्विनी कुमार, मुखिया श्याम सुन्दर साहू, कला एवं संस्कृति जिला पदाधिकारी चंदन कुमार आदि ने बाबा नागार्जुन की प्रतिमा पर पुष्पांजलि व श्रद्धांजली अर्पित कर विनम्र नमन निवेदित किया।
पुनश्च, मंच पर पधारे पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन एवं अतिथियों का मैथिल परंपरानुसार चंदन, पाग, शाॅल आदि से स्वागत अभिनंदन की औपचारिकता के उपरांत कार्यक्रम ने दिशा पकड़ी।
इसके पुर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी कृष्णानंद सदा ने नागार्जुन के घर की मिट्टी से चंदन कर उन्हें सादर नमन किया और बाबा के छोटे पुत्र श्यामकांत मिश्र से आशीर्वाद लिया। इस दौरान डीईओ श्री सदा ने कहा कि बाबा के जीवन का संघर्ष और बेवाक साहित्य आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान प्रखंड प्रमुख ने कहा कि यात्री बाबा नागार्जुन की रचनाओं विश्व के मानचित्र पर अपना स्थान बना लिया है और उन्हें कालजयी बना दिया है। बीडीओ प्रवीण कुमार ने कहा कि बाबा सत्ता व शासक और प्रशासन के गलत तरीके की आलोचना करने से नहीं चूकते थे। वहीं सीओ अश्विनी कुमार ने बाबा नागार्जुन के साहित्य को कुशासन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रभावी हथियार और उनकी शैली को प्रचंड धारदार करार देते हुए कहा कि कुरीतियों एवं कुव्यवस्था को धाराशाही करने से वे बाज नहीं आते थे।
जिला कला एवं संस्कृति अधिकारी ने कहा कि बाबा ने अपने लेखनी से सृजित जन आंदोलन को पीढ़ियों केलिए प्रेरक और अनुकरणीय बताया। इस दौरान प्रदेश महिला आयोग के अध्यक्ष अप्सरा मिश्र, तरौनी मुखिया श्याम सुंदर साहू, संतोष मिश्र, अशोक पाठक स्नेही, फणींद्र मिश्र, भोगेंद्र यादव, अनिल यादव, वाणेश्वरी न्यास समिति के सचिव संजीव झा, डॉ बचनेश्वर झा, संतोष साहु आदि ने भी बाबा के प्रति उद्गार व्यक्त किये। मंच संचालन राम बुलावन यादव ने किया।