
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
पूसा । पत्रकारिता के क्षेत्र में कैरियर तलाश रहे युवाओं केलिए कृषि पत्रकारिता (एग्री जर्नलिज्म) एक बहु उपयोगी और व्यापक संभावनाओं वाला पाठ्यक्रम है। कृषि पत्रकारिता से जुड़े पेशेवरों की भारत में अच्छी खासी जरूरत है लेकिन पेशेवर युवकों की कमी है।
इसे ध्यान में रखते हुए डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कुलपति डाॅ पीएस पांडेय ने कृषि पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा का पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। उक्त जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के सूचना पदाधिकारी डाॅ कुमार राज्यवर्धन ने बताया कि उक्त पाठ्यक्रम में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। इस पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए पंद्रह सीटें उपलब्ध हैं। जिसमें आरक्षण नीति के तहत लगभग सात सीटें सामान्य वर्ग के लिए उपलब्ध है।
डाॅ राज्यवर्धन ने बताया कि कृषि पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा एक वर्ष का पाठ्यक्रम है जिसमें विश्वविद्यालय में छ: महीने ऑफलाइन शिक्षा और किसी बडे चैनल या अखबार में छह महीने का इंटर्नशिप शामिल है।
उन्होंने बताया कि एग्री जर्नलिज्म में नामांकन के लिए किसी भी विषय में स्नातक होना अनिवार्य है। इसकेलिए अभ्यर्थियों को दो किश्तों में पाठ्यक्रम शुल्क के रूप में 50 हजार भुगतान करना होगा। पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट की सुविधा भी उपलब्ध है।
डाॅ राज्यवर्धन ने बताया कि भारत सरकार ने कृषि को समर्पित किसान चैनल भी शुरू किया है जिसमें कृषि पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद नौकरी मिल सकती है। इसके अतिरिक्त विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में कम्युनिटी रेडियो और टीवी स्टूडियो भी शुरू किया जा रहा है।
जिसमें कृषि पत्रकारिता से जुड़े छात्रों की आवश्यकता पड़ने वाली है। इसके अतिरिक्त सभी समाचार पत्र, समाचार एजेंसियां और टीवी चैनल कृषि आधारित विषयों के लिए ऐसे छात्रों की तलाश करते है जिनके पास कृषि पत्रकारिता से संबंधित डिग्री और अनुभव हो।
इसके अलावा एग्री जर्नलिज्म के उपरांत छात्र अपना यूट्यूब चैनल शुरू करके भी अच्छी खासी कमाई कर सकते है। एग्री जर्नलिज्म में नामांकन के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर ही परीक्षा ली जाएगी। पाठ्यक्रम से जुड़ी सारी जानकारी विश्वविद्यालय के वेबसाईट पर उपलब्ध है। नामांकन हेतु आवेदन ऑनलाइन लिये जा रहे हैं।