
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) की सहयोगी जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र जिले में बाल श्रम के खिलाफ अभियान चला रहा है।
इस संदर्भ में संस्था के सचिव सुरेन्द्र कुमार ने समस्तीपुर से बाल मजदूरी के खात्मे के लिए राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन मिशन शुरू करने और इसके लिए पर्याप्त संसाधनों उपलब्ध कराने की मांग की है। इस क्रम में जेजेबीवीके सचिव ने सुझाव देते हुए कहा है कि,
18 साल तक के बच्चों की मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा और पीड़ित बच्चों के पुनर्वास के लिए बाल मजदूर पुनर्वास कोष बनाया जाए। जिला स्तरीय चाइल्ड लेबर टास्क फोर्स का गठन, इस अभियान में योगदान कर रहे धावा दल को प्रयाप्त संसाधन तथा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए गाड़ी मुहैया कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाल अधिकार के मोर्चे पर जिला प्रशासन व समाज में जो सजगता व समन्वय दिख रहा है, उससे यह विश्वास जगता है कि हम जल्द हीं बाल श्रम मुक्त समस्तीपुर का सपना साकार होते देखेंगे।
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में जिला प्रशासन के सहयोग से हमने जिले में बाल श्रम के खिलाफ 40 छापामारी अभियान चलाए और इस दौरान 86 बच्चों को मुक्त कराये। इस विश्व बाल श्रम निषेध दिवस/सप्ताह पर भी जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र नें कार्रवाई की और चाईल्ड हेल्पलाइन और पुलिस प्रशासन के सहयोग से दो बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया।
बताते चलें कि बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिले में कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। जिसमें बाल मजदूरी के खिलाफ लोगों को जागरूक किया गया और इसके खात्मे का संकल्प लिया गया।
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव सुरेन्द्र कुमार ने एक रिपोर्ट के हवाले से कहा, “बाल श्रम के खात्मे की दिशा में दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है और इसका श्रेय राज्य सरकार और जिला प्रशासन की सतर्कता और संवेदनशीलता को जाता है। हमनें समस्तीपुर जिला में अब तक 315 बाल मजदूरों को मुक्त कराया है और उनके पुनर्वास की दिशा में भी प्रयास किए हैं।”
उन्होंने कहा कि पीड़ितों के पुनर्वास और अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई से हीं बाल मजदूरी पर रोक लग पाएगी और भारत इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने बाल श्रम के खात्मे के लिए समग्र नीतिगत बदलावों, सरकारी खरीदों में बाल श्रम का इस्तेमाल कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति, 18 साल तक मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा, पीड़ित बच्चों के पुनर्वास के लिए बाल मजदूर पुनर्वास कोष की स्थापना, खतरनाक उद्योगों की सूची में विस्तार, राज्यों को उनकी विशेष जरूरतों के हिसाब से नीतियां बनाने, बाल मजदूरी के खात्मे के लिए सतत विकास लक्ष्य 8.7 की समय सीमा को 2030 तक बढ़ाने, दोषियों के खिलाफ सख्त व त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा, “विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए बाल श्रम मुक्त आपूर्ति श्रृंखला, कौशल विकास और शिक्षित व जिम्मेदार नागरिक पहली शर्त हैं।