

सात दिवसीय विवाह गीत कार्यशाला के तीसरे दिन गारी के भाव सौन्दर्य पर हुई चर्चा।
ओईनी । वक्त और हालात के साथ आहिस्ता-आहिस्ता मैथिल संस्कृति से दूर हो रहे मिथिला की प्रथम राजधानी ओईनी स्थित शारदा अनिल सावित्री संगीत महाविद्यालय परिसर में स्नेहलता सावित्री रंगमंच द्वारा आयोजित सात दिवसीय विवाह गीत कार्यशाला के तीसरे दिन पारंपरिक विवाह गीतों में भाव सौन्दर्य व इनके प्रासंगिकता व औचित्य पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर छात्राओं को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के संस्थापक डाॅ सुनील कुमार सिंह ने कहा कि मिथिला में पारंपरिक विवाह गीतों के शब्द सहज, सरल होने के साथ-साथ गूढ भाव व रहस्य से ओतप्रोत होते हैं। हास-परिहास में सम्पूर्ण जीवन दर्शन का साक्षात्कार कराने वाले ये गीत जैसे कोहवर, आदि दो अनजान हृदय में परस्पर अनुराग व अटूट सात्विक प्रेम जगाने का सशक्त माध्यम भी होते हैं।
उन्होंने कहा कि ललित व सात्विक हास्य-विनोद हमारे संस्कार गीतों की अनुपम विशेषता है। इन गीतों में अश्लीलता भी परस्पर निश्च्छल सात्विक प्रेम, स्नेह व समर्पण की पराकाष्ठा का आभास कराती है। जो कहीं अन्यत्र नहीं दिखता।
रविवार को कार्यशाला में मैथिल संस्कृति के मूर्धन्य वाहक ख्यातिलब्ध लोक गायक कृष्ण कुमार कन्हैया नें विविध विवाह गीतों का प्रशिक्षण दिया। राम लखन सन सुन्दर वर के जुनि पारियौ केउ गाईर हे, आदि जैसे गारी में छिपे ललित हास्य विनोद व इसमें छिपे गूढ भावार्थ से परिचय कराया। साथ ही राम सिया के मधुर मिलन में फुलवारी मुस्काये, आदि गीत भी सिखाये।
तबले पर प्रभात कुमार तुलसी ने भावानुकूल संगत कर रसानुकूल समां बांधे रखा। मौके पर विमलेश कुमार, श्याम कुमार झा, रमेश कुमार शर्मा, रौशन कुमार, आदि मौजूद थे।