
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । स्थानीय विधायक व सांसद के अनुसार शहर में कथित तौर पर विकास की गंगा बह रही है। मगर इसी बीच यह भी एक तथ्य है कि शहर के मथुरापुर घाट पर बने पुल का आज तक नामाकरण नहीं हो पाना शहर वासियों को कचोटता है। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के संस्थापक सचिव सुरेन्द्र कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से उक्त पुल के नामाकरण को लेकर जिला के भूतपूर्व, पूर्व एवं वर्तमान विधायकों सांसदों, राज्य व केंद्रीय मंत्रियों, विधानपार्षदों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।
अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने बताया है कि लंबी प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद शहर के समस्तीपुर-दरभंगा पथ पर मथुरापुर व लक्ष्मीटाॅकिज के बीच स्थित अंग्रेजों के समय गंडक पर बने पुल के समानांतर पुल का निर्माण हुआ था। आम जनता तथा सवारी गाड़ियों के लिए दरभंगा जाने के लिए गंडक नदी पर बना यह पुल आज समस्तीपुर का लाईफ लाईन सिद्ध हो रहा है।
पूरा शहर गवाह है कि एक साधारण समाजसेवी एवं बंगाली टोला स्थित पंजाब चाट भंडार के मालिक स्वर्गीय मोहन लाल दिवान के अथक संघर्ष एवं जल समाधि लेने की नोटिश पर तत्कालीन कांग्रेसी हुकूमत की सरकार के जगने पर उक्त पुल का निर्माण हुआ। लेकिन खेद जनक है कि आज तक उसका आज तक नामाकरण नहीं हो पाया है। हालात ये हैं कि अब तो लोग स्व दीवान के संघर्ष को भूलने भी लगे हैं। नई पीढी को तो इसका लेश मात्र भी ज्ञान नहीं है।
इसलिए तमाम भूतपूर्व, पुर्व, निवर्तमान एवं वर्तमान जन प्रतिनिधियों से मेरा नम्र निवेदन है कि उक्त पुल का नाम मोहन लाल दिवान सेतु रखने की दिशा में जाति धर्म एवं दलगत भावना से ऊपर उठकर मजबूत पहल की जाए। जिसके लिए आप सभी लोग बधाई के पात्र समझे जाएंगे।