विधायक ने की यू आर काॅलेज में एक हजार क्षमता वाले कान्फ्रेंस हाॅल की घोषणा

ओईनी न्यूज नेटवर्क।
रोसड़। यू आर कॉलेज, रोसड़ा, डीबीकेएन कॉलेज,नरहन और एशोसिएशन फाॅर पाॅलिटिकल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चतुर्थ बिहार समाज विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन प्रथम सत्र में पैनल एक पर चर्चा आयोजित की गयी। इस अवसर पर सर्वप्रथम प्रधानाचार्य डॉ घनश्याम राय ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग, चादर और पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया।
तदुपरान्त विज्ञान समाज एवं विकास विषयक इस चर्चा में प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुबोध नारायण मालाकार ने कहा कि परिवर्तन या कहें बदलाव प्रकृति का आधारभूत सिद्धांत है। बदलाव प्रकृति ही नहीं किसी समाज या राष्ट्र के विकासोन्मुख और जीवन्त होने का स्वयंसिद्ध प्रमाण है और हर बदलाव का आधार विज्ञान है।
डाॅ मालाकार ने कहा कि भारतीय दर्शन में विज्ञान के विकास पर अत्यधिक कार्य हुआ एवं इसमें भी विमर्श की गुंजाइश बनी हुई है। कॉपरनिकस एवं ब्रूनो का उदाहरण देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों के सामने अनेक चुनौतियां आती रहती है। लेकिन वैज्ञानिक चाहे पूर्व का हो या पश्चिम का वैज्ञानिक हमेशा वैज्ञानिक होता है और उसके खोजों का असर पूरी दुनिया पर होता हो।
उन्होंने कहा कि विज्ञान उत्पादन की शक्ति के रूप में आता है तथा उत्पादन के संबंध को प्रभावित करता है और उत्पादन पद्धति में बदलाव का कारक भी बनता है। अपने संबोधन में डाॅ मालाकार ने ब्रूनो, स्टीफन हॉकिंस, आइंस्टीन एवं न्यूटन का भी उल्लेख किया। अंत में प्रोफेसर मालाकार ने कहा कि एक नीति विज्ञान के लिए बननी चाहिए और इस आशय का प्रस्ताव सरकार को बिहार समाज विज्ञान अकादमी के द्वारा एक मांग पत्र बना कर दे।
इस पैनल में चर्चा करते हुए प्रोफेसर कार्यानंद पासवान ने बताया कि विज्ञान चिर अपरिहार्य। विज्ञान व्यक्ति के विकास पथ से अंधविश्वास का अंधकार दूर करता है। इसलिए विज्ञान से जो नफरत करता है वह अंधविश्वासी होता है।
प्रो पासवान ने संपत्ति के व्यक्तिगत जमाखोरी को सभी प्रकार के अपराधों का कारण बताते हुए कहा कि यदि विज्ञान का प्रयोग पूंजी निर्माण के लिए करते हैं तो आप मनुष्य को ही नहीं समाज और राष्ट्र तक को उत्पादन प्रणाली से बहिष्कृत करते हैं।
इसलिए संसाधनों का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए एवं व्यक्तिगत संपत्ति की अवधारणा को समाप्त कर देना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डाॅ अनिल कुमार राय ने किया। तदुपरान्त,
डाॅ एस पी वर्मा मिमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राजमणि प्रसाद सिन्हा ने एस पी वर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समापन सत्र के मुख्य वक्ता स्थानीय विधायक बीरेन्द्र कुमार ने कार्यक्रम के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रोसड़ा में इस तरह के वैज्ञानिक सोच पर आधारित सम्मेलन इस क्षेत्र के लिए ही नहीं जिले केलिए भी मील का पत्थर साबित होगा।
इसी क्रम में बासा महासचिव, सम्मेलन के संयोजक सह यूआर काॅलेज के प्रधानाचार्य डॉ घनश्याम राय ने बासा के नयी कमिटी एवं एशोसियेशन फाॅर पाॅलिटिकल स्टडीज बिहार के छठे वार्षिक सम्मेलन का आयोजन करने के लिए ग्यारह सदस्यीय सम्मेलन तैयारी समिति के गठन की घोषणा की।
समापन समारोह में बीज वक्तव्य प्रोफेसर प्रेम मोहन मिश्रा ने दिया। तदुपरांत प्रोफेसर एस एन मालाकार, प्रोफेसर कार्यानंद पासवान, प्रोफेसर मुनेश्वर यादव, प्रोफेसर अनिल दत्त मिश्रा, डाॅ अमरेश कुमार सिंह, डॉ विनय कुमार आदि ने संबोधित किया। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर लालबाबू यादव ने बासा के नवगठित कमिटी का परिचय कराया गया और मंच पर सभी को सम्मानित किया।
धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर गौरीशंकर प्रसाद सिंह ने किया। समापन समारोह का संचालन डाॅ विनय कुमार ने किया।