
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
वाराणसी। खेती बिना खेत मशरुम सेहत, स्वाद और समृद्धि का अद्वितीय काॅम्बो है। पहले सिर्फ ठंड के मौसम में उगाया जाने वाला मशरुम आज हर मौसम में उगाया जा रहा है। साथ ही इसके औषधीय गुणो के कारण राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमेशा मांग रहती है। बनारस के पनियरा ग्राम स्थित रिन्यू ईडू हब के परिसर में आयोजित एकदिवसीय मशरुम उत्पादन सह प्रसंस्करण प्रशिक्षण के दौरान डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मशरुम वैज्ञानिक डाॅ दयाराम ने उक्त बातें कही। उन्होने कहा कि मशरुम उत्पादन एवं प्रसंस्करण के विभिन्न-विभिन्न तकनीकों को देश कोने-कोने में पहुंचाने केलिए प्रतिबद्ध हैं।
बताते चलें कि वाराणसी के आराजी लाईन विकास खंड के पनियरा ग्राम स्थित रिन्यू ईडू हब के परिसर में डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर के मशरुम वैज्ञानिक डाॅ. दयाराम एवं डाॅ. आरपी प्रसाद ने अनुसूचित जाति उप परियोजना के अंतर्गत मशरुम उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं डाॅ. रमेश चंद्र कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक ने कहा कि मशरुम उत्पादन के क्षेत्र में स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। लघु एवं सीमांत किसानो, भूमिहीन परिवारों, खास कर अनुसूचित जाति की महिलाओं केलिए यह स्व रोजगार एवं आर्थिक स्वावलंबन का बेजोड़ साधन है। इस खेती में महिलाएं घर में ही रह कर मशरुम एवं मशरुम के विभिन्न उत्पाद बनाकर आय सृजन कर सकती है और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
इस दौरान पूसा के मशरुम मैन डाॅ दयाराम ने कहा कि मशरुम कचरा प्रबंधन को भी बढावा देता है, क्योंकि इसके उत्पादन में कृषि अपशिष्ट का ही प्रयोग होता है। साथ ही मशरुम कटने के बाद मशरुम के अपशिष्ट खेतों में जैविक खाद के रूप में मृदा की उर्वरक क्षमता बढाने में सक्षम विकल्प बन जाते हैं।
अपने संबोधन में रुद्रकाशी फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक लल्लन दूबे ने बताया कि स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित मशरुम एवं इसके उत्पादों का विपणन हमारी कंपनी करेगी। वहीं जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार ने उद्यान विभाग की मशरुम से संबंधित योजनाओं के बारे में बताते हुए उसका लाभ लेने के लिए महिलाओं का आह्वान किया।
मौके पर उद्यान विभाग के प्रधान तकनीकी विशेषज्ञ ज्योति सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अरविंद पाण्डेय, राजेश मिश्र, जितेंद्र मिश्र, अम्बाश्री नीलम, शकुन्तला देवी, मुन्नी देवी, किसमति देवी, संध्या देवी समेत 90 अनुसूचित जाति की के साथ 125 लोगों ने प्रशिक्षण लिया।