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Home » दिग्भ्रमित जनता वोट देने को लाचार है, नोटा भी राजनीति का ही आविष्कार है – शिवेन्द्र पाण्डेय

दिग्भ्रमित जनता वोट देने को लाचार है, नोटा भी राजनीति का ही आविष्कार है – शिवेन्द्र पाण्डेय

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar27/01/2025No Comments3 Mins Read
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ओईनी न्यूज नेटवर्क

समस्तीपुर। ‍

दिग्भ्रमित जनता वोट देने को लाचार है, नोटा भी राजनीति का ही आविष्कार है।

इनमें उनमें नहीं फर्क है दिख रहा हमें, बटन कोई दबे , जनता की हार ही हार है।

कुछ इसी तरह की चुभती गुदगुदाती रचनाओं से सजी कुसुम पाण्डेय स्मृति साहित्य संस्थान के तत्वावधान में केन्द्रीय विद्यालय समस्तीपुर के निकट स्थित कुसुम सदन के प्रांगण में 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर रविवार को एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें दूर दूर से बड़ी संख्या में रचनाकार उपस्थित हुए। इस अवसर पर डॉ रामेश गौरीश ने उपस्थित सभी रचनाकारों का हार्दिक स्वागत किया। विष्णु कुमार केडिया की अध्यक्ष ता में आयोजित इस काव्य संध्या का संचालन प्रवीण कुमार चुन्नू ने किया। जिला के वरिष्ठतम पत्रकार चांद मुसाफिर तथा चर्चित गजलकार रंजना लता विशिष्ट अतिथि के रूप में विराजमान रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने जनवरी माह में उत्पन्न हिन्दी साहित्य के आधार स्तम्भ डॉ नरेश पाण्डेय चकोर, जनार्दन प्रसाद झा द्विज, आचार्य शिवपूजन सहाय,पं लक्ष्मी नारायण सुधांशु,जय नारायण मिश्र हेम, नाशाद औरंगाबादी, नन्द किशोर शर्मा, गौरी कांत चौधरी मुखिया जी, जय शंकर प्रसाद, जैनेन्द्र कुमार, कमलेश्वर, मोहन राकेश, डॉ विद्या निवास मिश्र, आदि के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया। साथ ही आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता स्वामी विवेकानंद, स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, चन्द्र शेखर तिवारी आजाद और महात्मा गांधी के शौर्य और उत्सर्ग की चर्चा करते हुए उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। तदुपरान्त मौजूदा राजनीति को उकेरती चुटीली रचनायें, प्राकृतिक सौंदर्य को स्पंदित कराती रचनायें, हास्य व्यंग्य, ग़ज़ल, रोमांटिक, भक्ति परक रचनाएं तथा भोजपुरी मैथिली बज्जिका के गीतों के संग लोग घंटों सम्मोहन की अवस्था में कवियों के रस भाव से सराबोर होते रहे। डॉ राम सूरत प्रियदर्शी के सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ होने के बाद राम लखन यादव, डॉ , राज कुमार चौधरी, शिवेंद्र कुमार पाण्डेय, विष्णु कुमार केडिया, राजकुमार राय राजेश, रामाश्रय राय राकेश, प्रवीण कुमार चुन्नू, दीपक कुमार श्रीवास्तव, आचार्य डॉ गंगा प्रसाद आजाद सतमलपुरी, डॉ अशोक कुमार सिन्हा, डॉ राम सूरत प्रियदर्शी, प्रशांत कुमार मदन,विमल कुमार, डॉ अरुण अभिषेक, आचार्य परमानंद प्रभाकर, रंजना लता, मो जावेद, चांद मुसाफिर, रत्नेश कुमार, डाॅ परमानंद लाभ आदि ने अपनी रचनायें पढी। कार्यक्रम के समापन के पूर्व डॉ अरुण अभिषेक को चादर पागल माला प्रशस्ति पत्र आदि से समवेत रुप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के लगभग अंत में हिन्दुस्तान समाचार पत्र के वरिष्ठ संवाददाता केशव कुमार ने जिला के वरिष्ठतम छाया कार विजय सिन्हा के साथ रचनाकारों से वर्तमान में हिन्दी साहित्य और साहित्यकारों की कठिनाईयों और उसके निदान पर परिचर्चा एवं मौजूदा हालात में काव्य गोष्ठी के आयोजन के महत्व एवं भूमिका की समीक्षा की।

 

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