
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। “अभी राज्य में ज्यादातर गुड़ पश्चिम उत्तर प्रदेश से आता है, लेकिन वर्तमान सरकार गुड़ के क्षेत्र में बिहार को आत्मनिर्भर बनना चाहती है।
विश्वविद्यालय राज्य सरकार के सहयोग से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में गुड़ प्रसंस्करण उद्योग को विकसित करने का प्रयास कर रहा है। यह प्रशिक्षण भी उसी का एक कड़ी है।”
डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में गन्ना अनुसंधान संस्थान के सभागार में आयोजित गुड़ उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कुलपति डॉ पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही।
कुलपति ने वन टू वन की बात :
इस दौरान स्वागत, उद्घाटन आदि औपचारिकताओं के बाद कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने प्रशिक्षणार्थियों से उनका परिचय जाना और विभिन्न आयामों पर वन टू वन बातचीत करते हुए कहा कि बिहार में गुड़ उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं।
मार्केटिंग और प्रसंस्करण भी सीखें किसान :
डॉ पाण्डेय ने कहा कि, “चौथे कृषि रोड मैप के तहत विश्वविद्यालय, राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसमें राज्य सरकार के अधिकारियों का भी पूर्ण सहयोग मिल रहा है।” अपने संबोधन में उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि “वे सिर्फ गुड़ प्रसंस्करण ही नहीं बल्कि गुड़ के मार्केटिंग और ब्रांडिंग के बारे में भी जानकारी हासिल करे।”
प्रश्न पूछने में संकोच नहीं करें :
इस दौरान उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि, “प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिक आसान भाषा में उन्हें सभी चीजें समझाने का प्रयास करेंगे लेकिन यदि कहीं भी कुछ समझ न आये तो वे प्रश्न पूछने में हिचकिचाहट नहीं महसूस करें।”
दस जिलों के किसान हो रहे शामिल :
गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ देवेन्द्र सिंह ने बताया कि, “इस प्रशिक्षण में राज्य के दस से अधिक जिले के किसान भाग ले रहे हैं। सात दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान ठंड को ध्यान में रखकर प्रशिक्षुओं के लिए रहने व खाने के इंतजाम किया गया है।”
5 से अधिक प्रभेद :
उन्होंने कहा कि, “विश्वविद्यालय में कुलपति के नेतृत्व में गन्ना अनुसंधान संस्थान काफी अच्छा कार्य कर रहा है। इस संस्थान ने पिछले तीन साल में पांच से अधिक प्रभेद और तकनीक भी विकसित किए हैं।
लगेंगे 500 से अधिक गुड़ प्रसंस्करण उद्योग :
राष्ट्रीय स्तर पर भी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के मीटिंग में संस्थान के कार्यो की सराहना की गई है।” डॉ सिंह ने कहा कि आने वाले दो वर्ष में विश्वविद्यालय राज्य में पांच सौ से अधिक गुड़ प्रसंस्करण उद्योग शुरू कराना चाहता है। जिसको लेकर युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
स्वास्थ्य केलिए गुड़ लाभकारी :
अपने संबोधन में स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ मयंक राय ने कहा कि गन्ना उत्पादन में बिहार एक प्रमुख राज्य रहा है। लेकिन विभिन्न कारणों से यह पिछड़ता चला गया। लेकिन अब काफी तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोग अब चीनी से ज्यादा गुड़ को पसंद करने लगे हैं। गुड़ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
कई पदाधिकारी थे मौजूद :
कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार के उपनिदेशक गन्ना एवं अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डा सुनीता मीणा ने किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ बलवंत कुमार, डॉ सीके झा, डॉ मिनातुल्ला, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।