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हरित क्रांति 2.0 : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय रचने जा रहा इतिहास

देश को मिलेंगे प्राकृतिक खेती के पहले ग्रेजुएट्स
Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar17/06/2026Updated:17/06/2026No Comments3 Mins Read
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प्रतिभागी को पत्र सौंपते केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री व अन्य।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 पूसा। भारत के कृषि जगत में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। क्योंकि पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा संस्थान बनने जा रहा है, जो भारत को बी.एससी. एग्रीकल्चर (प्राकृतिक खेती) के ग्रेजुएट्स का पहला बैच सौंपेगा। हालांकि, इस अनोखे पाठयक्रम की शुरुआत केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल और डीआरपीसीएयू, पूसा में एक साथ की गई थी। किन्तु अपने कुशल और ससमय शैक्षणिक सत्र के कारण पूसा विश्वविद्यालय इस रेस में आगे निकल गया है।

जलवायु अनुकूल खेती के नए युग की शुरुआत :

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती में स्नातकों की यह पहली खेप भारतीय कृषि की दिशा और दशा बदलने में मील का पत्थर साबित होगी। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बंजर होती धरती और पर्यावरण संकट के बीच, ये युवा प्रोफेशनल्स रसायन मुक्त खेती के संवाहक बनेंगे और पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक पारिस्थितिकी विज्ञान के तालमेल से देश में एक टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती के नए युग की शुरुआत करेंगे

पूरे बैच को पेड इंटर्नशिप और 100% प्लेसमेंट ऑफर :

इस विशेष कोर्स की बाजार में भारी मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की बड़ी कंपनियों ने अभी से इन छात्रों को हाथों-हाथ लेना शुरू कर दिया है। इस क्रम में पटना की ‘सावित्री रिन्यूएबल एनर्जी’ सहित कई बड़ी ग्रीन एनर्जी कंपनियों ने पूरे बैच को पेड इंटर्नशिप और 100% प्लेसमेंट का ऑफर दिया है।

कॉर्पोरेट नौकरियों में नहीं कृषि सुधार में अभिरुचि :

हालांकि, नौकरी के इन आकर्षक प्रस्तावों से इतर कई छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘रासायन मुक्त आत्मनिर्भर कृषि’ के आह्वान से प्रेरित होकर एक अलग राह चुनी है। ये छात्र कॉर्पोरेट नौकरियों के बजाय जमीनी स्तर पर कृषि सुधार के लिए काम करना चाहते हैं। तीन साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, यह बैच देश के अग्रणी ऑर्गेनिक हब जैसे अररिया और तिप्तूर (कर्नाटक) स्थित ‘अक्षय कल्प ऑर्गेनिक’ में अपनी अंतिम वर्ष की व्यावहारिक इंटर्नशिप पूरी करेंगे।

पीएम मोदी के विजन को मिलेगी गति : रामनाथ ठाकुर 

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने डीआरपीसीएयू के इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की जम कर सराहना की। इस क्रम में उन्होंने कहा, “यह अग्रणी बैच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और रसायन-मुक्त कृषि इकोसिस्टम के सपने को पूरा करने की दिशा में, महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। मैं कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय और उनकी पूरी टीम को इस दूरदर्शी पाठ्यक्रम के लिए बधाई देता हूं। जिन्होंने न केवल इस पाठ्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि इसके राष्ट्रीय पाठ्यक्रम को भी बेहद बारीकी से तैयार किया है।”

हमारे छात्र होंगे ‘कृषि में बदलाव’ के अग्रदूत : कुलपति

वहीं, इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा, “प्राकृतिक खेती आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह मिट्टी की सेहत को पुनर्जीवन प्रदान करती है, जैव विविधता को बढ़ाती है और महंगे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता खत्म कर किसानों की लागत को काफी हद तक कम करती है। यह न केवल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी जहर-मुक्त और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित कराएगी। हमें गर्व है कि हमारे छात्र भारतीय कृषि में इस बदलाव के अग्रदूत बनने जा रहे हैं।”

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Dr. Rajendra Prasad Central Agriculture University Pusa M/s Akshayakalpa Organic Shardanagar Tiptur Karnataka M/s Bhima Kamat Araria M/s Savitri Renewable Energy Private Limited Patna
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