Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • रोसड़ा डीसीएलआर कंचन झा घरेलू नौकर के साथ रिश्वत लेते गिरफ्तार
    • प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मांगी दो पालियों में वर्ग संचालन की अनुमति
    • मुंगेर विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह 11 को
    • समस्तीपुर में 2500 से अधिक युवाओं को मिलेगा सीधा रोजगार
    • शोध परिषद की बैठक में 50 कृषि परियोजनाओं को वित्त पोषण की मिली हरी झंडी, 2-3 साल में दिखेगा असर
    • समन्वित रूप से कार्य करते हुए आयोजन को बनाएं सफल एवं यादगार : कुलपति
    • इस वर्ष भी समारोह पूर्वक मनेगी पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे की 166वीं जयंती ‘संगीताञ्जलि’
    • एआई, डिजिटल एग्रीकल्चर और रोबोटिक्स बदल देंगे पूरी दुनिया के कृषि का स्वरूप : कुलपति
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Login
    OINI24
    • होम |
    • देश/विदेश |
    • राज्य |
    • बिहार |
    • समस्तीपुर |
    • बिजनेस |
    • कृषि |
    • शिक्षा |
    • धर्म |
    • उपलब्धि |
    • सामाजिक |
    • विविध |
    • स्वास्थ्य
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Login
    OINI24
    • होम |
    • देश/विदेश |
    • राज्य |
    • बिहार |
    • समस्तीपुर |
    • बिजनेस |
    • कृषि |
    • शिक्षा |
    • धर्म |
    • उपलब्धि |
    • सामाजिक |
    • विविध |
    • स्वास्थ्य
    Home » बिहार में विश्वविद्यालय स्तर पर पहली बार आयोजित सीप पालन व मोती उत्पादन प्रशिक्षण संपन्न,

    बिहार में विश्वविद्यालय स्तर पर पहली बार आयोजित सीप पालन व मोती उत्पादन प्रशिक्षण संपन्न,

    90 महिलाओं को किया गया प्रशिक्षित
    Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar24/05/2026No Comments3 Mins Read
    Facebook WhatsApp Twitter Email
    कार्यक्रम में शामिल पदाधिकारी व अन्य।

    ओईनी न्यूज नेटवर्क।

    Oini 24 मुजफ्फरपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत मात्स्यिकी महाविद्यालय, ढोली में आयोजित “मीठे जल में सीप पालन सह मोती संवर्धन” विषयक तीसरे तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को सफलता पूर्वक समापन हो गया। 21 से 23 मई तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीविका से जुड़ी अनुसूचित जाति की महिलाओं को सीप पालन व मोती उत्पादन के आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

    विश्वविद्यालय स्तर पर बिहार में पहला प्रशिक्षण :

    माना जा रहा है कि यह बिहार में किसी विश्वविद्यालय द्वारा दिया जाने वाला पहला प्रशिक्षण है जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं को मोती उत्पादन की तकनीक सिखाया गया।

    रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर :

    समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कहा कि, बाजार में असली मोती की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित है। मांग और आपूर्ति में व्यापक अंतर देख कर कहा जा सकता है कि, मोती पालन भविष्य में एक बड़े उद्योग का रूप ले सकता है। ऐसे में प्रशिक्षित महिलाएं इस क्षेत्र में आगे बढ़कर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।

    प्राप्त ज्ञान से व्यवसाय शुरू करने का आह्वान :

    इसी क्रम में सम्मानित अतिथि उप-कुलसचिव (शिक्षा) डॉ. रंजीत कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन के लिए महाविद्यालय की सराहना की। वहीं विशिष्ट अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. बी.के. महापात्रा ने कहा कि मोती पालन ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाला उभरता हुआ क्षेत्र है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से तकनीकी ज्ञान को व्यवहार में उतारकर व्यवसाय शुरू करने का आह्वान किया।

    दिया जा चुका 90 महिलाओं को प्रशिक्षण :

    मत्स्यकी महाविद्यालय, ढोली के अधिष्ठाता डॉ. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बना कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि अब तक तीन चरणों में जीविका से जुड़ी कुल 90 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये महिलाएं आगे चलकर सीप पालन और मोती उत्पादन को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य करेंगी और समाज में आर्थिक बदलाव की नई मिसाल बनेंगी।

    आभार और सराहना :

    इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शिक्षा प्रभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक अनिशा एवं मुरौल प्रखंड परियोजना प्रबंधक अर्चना शर्मा के सहयोग की भी सराहना की।

    धन्यवाद ज्ञापन और उपस्थिति :

    प्रशिक्षण के दौरान मत्स्य संसाधन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्यामनाथ झा ने परियोजना के उद्देश्य एवं इससे होने वाले लाभ लाभों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम कुमार कुर्मी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परियोजना की प्रधान अन्वेषिका डॉ. अदिता शर्मा ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के कई शिक्षक, तकनीकी कर्मी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

    How useful was this post?

    Click on a star to rate it!

    Average rating 0 / 5. Vote count: 0

    No votes so far! Be the first to rate this post.

    Dr. Rajendra Prasad Central Agriculture University Pusa Fisheries College Dholi Oyster Farming and Pearl Production Tirhut College Of Agriculture Dholi
    Share. Facebook WhatsApp Twitter Email
    Dr. Sanjay Kumar
    • Website

    Related Posts

    प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मांगी दो पालियों में वर्ग संचालन की अनुमति

    08/08/2026

    मुंगेर विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह 11 को

    08/08/2026

    शोध परिषद की बैठक में 50 कृषि परियोजनाओं को वित्त पोषण की मिली हरी झंडी, 2-3 साल में दिखेगा असर

    07/08/2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    Donate Now

    Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

    News

    • World
    • US Politics
    • EU Politics
    • Business
    • Opinions
    • Connections
    • Science

    Company

    • Information
    • Advertising
    • Classified Ads
    • Contact Info
    • Do Not Sell Data
    • GDPR Policy
    • Media Kits

    Services

    • Subscriptions
    • Customer Support
    • Bulk Packages
    • Newsletters
    • Sponsored News
    • Work With Us

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    © 2026 oini24. Designed by CS.
    • Privacy Policy
    • Terms
    • Accessibility
    • Contact

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Sign In or Register

    Welcome Back!

    Login to your account below.

    Lost password?