
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। कृषि के विकास में पैक्स प्रबंधक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि उर्वरक अनुज्ञप्ति मात्र एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषण के प्रति एक जिम्मेदारी भी है।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केन्द्र, बिरौली के परिसर में पैक्स प्रबंधकों के लिए ‘समेकित पोषक तत्व प्रबंधन’ विषय पर आयोजित 15 दिवसीय प्रशिक्षण के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने उक्त बातें कही।
खेती की लागत कम और मिट्टी की उर्वरता बनी रहे :
उन्होंने कहा कि, “प्रशिक्षण के दौरान अर्जीत ज्ञान को जमीनी स्तर पर उतारने की जरूरत है, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा।” अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय के त्रिआयामी गतिविधियों शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार पर भी विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि, “किसानों को केवल उर्वरक उपलब्ध ही नहीं कराना चाहिए, बल्कि उन्हें समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों के प्रति जागरूक भी करना चाहिए। ताकि खेती की लागत कम हो सके और मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।”
विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों तथा बीज उत्पादन इकाई का भ्रमण :
इस दौरान डॉ. सिंह ने केवीके परिसर में लगे विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों तथा बीज उत्पादन इकाई का भ्रमण भी किया और कृषि विज्ञान केन्द्र के गतिविधियों की सराहना की तथा भविष्य की कार्ययोजना को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये।
स्वागत व विषय प्रवेश :
कार्यक्रम के आरम्भ में सर्वप्रथम केवीके बिरौली के हेड डॉ. आर.के. तिवारी ने मुख्य अतिथि डॉ. सिंह का पुष्पगुच्छ एवं शॉल से स्वागत करते हुए विषय प्रवेश कराया और कहा कि, “प्रशिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय एवं अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों के द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया गया। जिससे निश्चित ही प्रशिक्षुओं को लाभ मिलेगा।”

प्रमाण पत्र वितरण :
अंत में सभी प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किया दया। कार्यक्रम का संचालन उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. धीरु कुमार तिवारी ने किया। इस दौरान विशेषज्ञ सुमित कुमार सिंह, निशा रानी सहित प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे।