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    Home » अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन एवं मजदूरों की कमी जैसी परिस्थितियों में डीएसआर तकनीक उपयोगी : डॉ. आर.के. तिवारी

    अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन एवं मजदूरों की कमी जैसी परिस्थितियों में डीएसआर तकनीक उपयोगी : डॉ. आर.के. तिवारी

    केवीके बिरौली में डीएसआर तकनीक पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
    Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar29/05/2026No Comments3 Mins Read
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    प्रशिक्षण में शामिल पदाधिकारी।

    ओईनी न्यूज नेटवर्क।

    Oini 24 समस्तीपुर। धान की खेती में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक मौजूदा दौर की आवश्यकता है। यह तकनीक कम पानी, कम श्रम एवं कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सहायक है।

    डीएसआर तकनीक को गांवतक पहुंचाने का आह्वान : 

    केवीके बिरौली में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक” विषयक एक दिवसीय प्रशिक्षण का उद्घाटन करते हुए केंद्राध्यक्ष डॉ आर.के. तिवारी ने अपने संबोधन में उक्त बातें कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि, “अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन एवं मजदूरों की कमी जैसी परिस्थितियों में डीएसआर तकनीक किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।” उन्होंने प्रतिभागियों को इस तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    डीएसआर तकनीक विषयक एक दिवसीय प्रशिक्षण :

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से सम्बद्ध कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली द्वारा डॉ. रेड्डी फाउंडेशन, समस्तीपुर के एक्सटेंशन फंक्शनरीज के लिए “डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक” विषयक एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।

    उद्घाटन :

    इस अवसर पर सर्वप्रथम अतिथियों के स्वागत सम्मान की औपचारिकता के बाद कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आर.के. तिवारी तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अनुसंधान निदेशक एवं कृषि वैज्ञानिक प्रो. डॉ. मुकेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत किया।

    20 एक्सटेंशन फंक्शनरीज हुए शामिल :

    कृषि अभियंत्रण विभाग की वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक ई. विनीता कश्यप के नेतृत्व में सम्पन्न इस प्रशिक्षण में कुल 20 एक्सटेंशन फंक्शनरीज ने भाग लिया।

    इस दौरान प्रो. डॉ. मुकेश कुमार ने “डीएसआर तकनीक में खरपतवार प्रबंधन” विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि, “डीएसआर तकनीक में खरपतवार नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है, जिसके कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है।”

    समस्या एवं समाधान पर चर्चा :

    इस दौरान उन्होंने खरपतवार प्रबंधन के विभिन्न वैज्ञानिक उपायों, समय पर खरपतवारनाशी के प्रयोग एवं समेकित खरपतवार प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने डीएसआर तकनीक के दौरान किसानों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं एवं उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की।

    दी व्यावहारिक जानकारी :

    ई. विनीता कश्यप ने प्रशिक्षण के दौरान डीएसआर तकनीक में उपयोग होने वाली उन्नत कृषि यंत्रों की जानकारी देते हुए इंक्लाइंड प्लेट प्लांटर एवं ड्रम सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, उनकी कैलिब्रेशन प्रक्रिया, रख-रखाव एवं सावधानियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।

    शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान :

    इस क्रम में उन्होंने बताया कि, इन यंत्रों के सही उपयोग से बीज की बचत, समय की बचत तथा बेहतर अंकुरण सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को डीएसआर तकनीक से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी तथा प्रशिक्षुओं के शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान किया।

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