
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। सीप पालन और मोती पालन आज एक उभरता हुआ क्षेत्र है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में आर्थिक स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए जीविकोपार्जन एवं स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
आर्थिक स्थिति होगी मजबूत :
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय अंतर्गत मत्स्यकी महाविद्यालय ढोली में “मीठे जल में सीप मोती संवर्धन” विषय पर आयोजित तीसरे तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. सिंह ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। इस दौरान उन्होंने उन्होंने कहा कि, “यदि महिलाएं प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी ज्ञान को व्यवहारिक जीवन में अपनाएं तो यह प्रशिक्षण उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
आर्थिक स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भरता :
बताते चलें कि, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय अंतर्गत मत्स्यकी महाविद्यालय ढोली में आरम्भ इस प्रशिक्षण की खासियत यह है कि, किसी विश्वविद्यालय द्वारा बिहार में पहली बार महिलाओं को मोती उत्पादन एवं संवर्धन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे उन्हें स्वरोजगार से आर्थिक स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में नई पहचान मिलेगी।
अतिथियों का स्वागत :
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण एवं विषय प्रवेश के साथ हुई। इस क्रम में परियोजना की प्रधान अन्वेषिका डॉ. अदिता शर्मा एवं महाविद्यालय के शिक्षक रोशन कुमार राम ने अतिथियों व प्रशिक्षुओं का स्वागत किया।
विषय प्रवेश :
तत्पश्चात, मत्स्यकी महाविद्यालय ढोली के अधिष्ठाता डॉ. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने विषय प्रवेश कराते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाना है।
रोजगार के नए अवसर :
उन्होंने कहा कि, “बिहार राज्य में पहली बार इस प्रकार का मोती पालन प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है और इसका यह तृतीय चरण है। यह प्रशिक्षण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण साबित होगा।”
संचालन :
इस क्रम में उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शिक्षा प्रभाग और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।“ कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम कुमार कुर्मी ने किया।
परियोजना का लाभ और उद्देश्य :
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए मत्स्य संसाधन प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम नाथ झा ने परियोजना के उद्देश्य एवं लाभों की विस्तृत जानकारी दी।
उपस्थिति :
इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. शिवेंद्र कुमार, डॉ. राजीव कुमार ब्रह्मचारी, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. मोगललेकर एच.एस., डॉ. सनाईमा सिंघा, चांदनी राय दत्त, पाटेकर प्रकाश गोरक्षा, अभिलिप्सा विस्वाल, डॉ. संजेबम विद्यासागर सिंह, अधिष्ठाता के निजी सहायक डॉ. राजेश कुमार, जीविका मुरौल के प्रखंड परियोजना प्रबंधक अर्चना शर्मा, सामुदायिक समन्वयक शुभलता कुमारी एवं सरिता कुमारी सहित महाविद्यालय के अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तनुश्री घोड़ई ने किया।