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Home » राहुल सांकृत्यायन का सदैव ऋणी रहेगा हिंदी साहित्य जगत – डॉ. अरुण

राहुल सांकृत्यायन का सदैव ऋणी रहेगा हिंदी साहित्य जगत – डॉ. अरुण

विलक्षण प्रतिभा के धनी राहुल सांकृत्यायन’ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी
Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar09/04/2026Updated:09/04/2026No Comments3 Mins Read
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संगोष्ठी का उद्घाटन करते प्राचार्य व अन्य।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 समस्तीपुर। शहर के जितवारपुर स्थित समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की 133वीं जयंती के अवसर पर ‘विलक्षण प्रतिभा के धनी राहुल सांकृत्यायन’ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

अध्यक्षता व संयोजन : 

संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार शशि एवं संयोजन हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. महेश कुमार चौधरी ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वरनगर, दरभंगा के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष-सह-मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) चंद्रभानु प्रसाद सिंह एवं संत कबीर महाविद्यालय समस्तीपुर के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार आमंत्रित थे।

स्वागत व शुभारंभ : 

मिथिला परंपरा अनुसार आगंतुक वक्ताओं को प्रधानाचार्य ने पुष्पमाला, चादर, पाग एवं स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन, एवं छात्र छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना, कुलगीत एवं स्वागत गीत के साथ संगोष्ठी की शुरुआत की गई।

आज भी प्रासंगिक और अनुकरणीय हैं राहुल सांकृत्यायन :

डॉ. महेश कुमार चौधरी ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि महापंडित राहुल सांकृत्यायन जैसे व्यक्तित्व विरले ही जन्म लेते हैं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को जिस ऊॅंचाई तक पहुॅंचाने का कार्य किया है वह अनुकरणीय है। उन्होंने समाज में व्याप्त बाह्याडंम्बर, कुप्रथाओं, अंधविश्वास, ऊॅंच-नीच, वर्गवाद आदि का मुखर विरोध किया। उनकी लेखनी मानव-कल्याण, सामजिक समरसता एवं सहिष्णुता को निरंतर मजबूत करती रही। जो आज भी प्रासंगिक और अनुकरणीय है।

जीवन में अपनायें उनके विचार :

प्रधानाचार्य ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि राहुल सांकृत्यायन भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए थे। उनके विचारों को छात्र-छात्राओं को अपने जीवन में अपनाकर मानव कल्याण हेतु कार्य करना चाहिए। 

सामाजिक न्याय को आधार प्रदान किया :

प्रो. (डॉ.) चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन प्रगतिशील विचारों के पोषक थे। उन्होंने जातीय एवं धार्मिक दीवारों को मिटाने के लिए अपूर्व एवं अनुकरणीय कृतियों का सृजन किया। उन्होंने सामाजिक दायित्वों की पूर्ति एवं सामाजिक न्याय को आधार प्रदान किया।

साहित्य जगत उनका ऋणी :

डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन ने भारतीय साहित्य एवं दर्शन को नयी ऊंचाइयां प्रदान की। उन्होंने जनमानस को जीवन जीने की कलाओं से परिचित कराया। साहित्य जगत उनके योगदान के लिए ऋणी रहेगा।

मातृभाषा प्रेम :

शिक्षाविद शाह ज़फ़र इमाम ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन ने विदेशी भाषाओं के माध्यम से ज्ञान व चेतना का अर्जन कर भारतीय भाषाओं में अपनी बात कही, जो मातृभाषा प्रेम को दर्शाता है।

प्रतिभागियों को किया गया पुरस्कृत :

इस अवसर पर विषय पर आधारित बेहतरीन विचार प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों में प्रथम स्थान निखिल कुमार एवं चंदन कुमार, द्वितीय स्थान शिवानी कुमारी एवं तृतीय स्थान अंबिका कुमारी ने प्राप्त किया। सभी विजेताओं को प्रधानाचार्य के द्वारा मेडल देकर सम्मानित किया गया। 

संचालन व धन्यवाद ज्ञापन :

मौके पर डॉ राहुल मनहर, डॉ दयानंद मेहता, डॉ दिनेश्वर राय, डॉ अशोक कुमार, डॉ सुमन कुमार सिंहा, डॉ विनय कुमार रमण, रौशन कुमार, राम कुमार, अंजलि कुमारी, नेहा कुमारी, प्रीति कुमारी आदि मौजूद थे। डॉ. अपराजिता राय ने मंच संचालन एवं शिवानी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

संगोष्ठी में शामिल प्राध्यापक व प्रतिभागी।

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