
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 दरभंगा। 2020 से पहले के भी सभी डिग्रियों को क्रमबद्ध ढंग से अपलोड करें। साथ ही, विश्वविद्यालय में शिक्षक एवं छात्र अनुपात को ठीक करने केलिए शिक्षकों की बहाली तथा भौतिक संरचना बढ़ाने का निर्देश दिया। ताकि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
पीपी प्रेजेंटेशन को सराहा :
बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत) ने मंगलवार को लोक भवन, पटना में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी के पीपीटी प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए उक्त बातें कही।
नैक मूल्यांकन–3 में बी प्लस प्लस :
इस दौरान कुलाधिपति ने ससमय उपयोगिता प्रमाण पत्र देने, परीक्षा आयोजित कराने परंपरागत विश्वविद्यालयों में नैक मूल्यांकन के तीसरे चक्र के मूल्यांकन में बी प्लस प्लस ग्रेड पाने वाला बिहार का एकमात्र विश्वविद्यालय बनने केलिए सराहना की।
11 लाख से अधिक डिग्रियों को किया अपलोड :
बताते चलें कि, परंपरागत विश्वविद्यालयों में डिजिलॉकर पर डिग्रियां अपलोड करने में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय राज्य में प्रथम स्थान, जबकि समर्थ मॉड्यूल लागू करने में द्वितीय स्थान पर रहा। गौरतलब है कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा ने अब तक डिजिलॉकर पर 11 लाख से अधिक डिग्रियों को अपलोड किया है।
शिक्षक छात्र अनुपात :
कुलाधिपति के साथ बैठक के दौरान विश्वविद्यालय ने आगे चार मॉड्यूलों पर काम करने की योजना प्रस्तुत की, जिनमें- एकेडमिक माड्यूल, थीसिस मैनेजमेंट माड्यूल, बजट मॉड्यूल तथा स्टेट मॉड्यूल शामिल हैं। विश्वविद्यालय की ओर से उच्च शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षक छात्र अनुपात को यूजीसी के मापदंड के अनुसार करने का आग्रह किया गया। कुलाधिपति ने शैक्षणिक गुणवत्ता केलिए इसे महत्वपूर्ण करार देते हुए उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल को तत्संबंधी निर्देश दिए।
स्नातकोत्तर में दो वर्षीय एवं एक वर्षीय पाठ्यक्रम :
प्रेजेंटेशन में नव स्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों की समस्याओं से भी लोक भवन को अवगत कराया गया। विश्वविद्यालय की ओर से यूजीसी पैटर्न पर स्नातकोत्तर में दो वर्षीय एवं एक वर्षीय पाठ्यक्रम को 2026 से ही लागू करने का आग्रह किया गया।
एनसीसी के प्रमाण पत्रों की उपलब्धियों का डेटा :
साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित फॉरेन लैंग्वेज में अन्य विदेशी भाषाओं को भी शामिल करने का सुझाव दिया, ताकि छात्रों को रोजगार मिल सके। उन्होंने एनसीसी पर जोर देते हुए कैडेट्स को दिए गए बी एवं सी सर्टिफिकेट्स तथा उनकी सेना तथा राज्य पुलिस में उपलब्धियों का डेटा संग्रह करने का सुझाव दिया। इस दौरान कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय से संबंधित अन्य प्रशासनिक एवं शैक्षणिक बेहतरी के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
उपस्थिति :
बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) चौधरी के साथ वित्तीय परामर्शी सह वित्त पदाधिकारी इन्द्र कुमार, कुलसचिव डॉ दिव्या रानी हंसदा, आइक्यूएसी निदेशक डॉ मो ज्या हैदर, परीक्षा नियंत्रक डॉ ईसान अली तथा सीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) मुश्ताक अहमद एवं यू आर कॉलेज, रोसरा के प्रधानाचार्य प्रो (डॉ.) संजय झा, कुलपति के सचिव डॉ सैयद मो जमाल अशरफ एवं आईटी सेल के ई. गणेश कुमार पासवान आदि शामिल थे।

“जहाने उर्दू” का 100 वां विशेषांक:
इस अवसर पर प्रो मुश्ताक अहमद ने अपने संपादन में गत 25 वर्षों से संपादित शोध जर्नल “जहाने उर्दू” के दो खण्डों में प्रकाशित 100 वां विशेष अंक कुलाधिपति को भेंट की, जिसकी कुलाधिपति ने सराहना की।