
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। “यह सम्मेलन सिर्फ शोध पत्रों का संकलन नहीं है, बल्कि जमीनी समाधान का मंच है। हमें हर केवीके में महिला किसान सहायता डेस्क बनानी होगी और प्रसार कार्यकर्ताओं को जेंडर संवेदी प्रशिक्षण देना होगा।”
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन सम्मेलन के आयोजन सचिव निदेशक, स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट ने डॉ. राम दत्त ने उक्त बातें कही।
महिला उद्यमिता को बाजार लिंकेज से जोड़ रहा विश्वविद्यालय :
इस दौरान उन्होंने कहा कि, विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय के नेतृत्व में महिला उद्यमिता को स्टार्टअप इन्क्यूबेशन और बाजार लिंकेज से जोड़ रहा है। सहभागी वीडियो, श्रम घटाने वाले यंत्र और डिजिटल टूल को महिला समूहों के माध्यम से बड़े पैमाने पर ले जाना ही लक्ष्य है।
तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन :
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन देश भर से आये कृषि वैज्ञानिकों ने एक सौ से अधिक अनुसंधान पत्र प्रस्तुत किये। कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करना : सतत कृषि विकास के लिए रणनीति विस्तार आधारित इस सम्मेलन में देश भर के कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता और प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं।
तकनीकी सत्र 2 – 40+ शोध पत्र प्रस्तुत :
सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को लिंग संवेदी कृषि प्रसार एवं सलाहकार सेवायें विषयक तकनीकी सत्र 2 की अध्यक्षता डॉ. सतीश कुमार सिंह और सह-अध्यक्ष डॉ. राजीव बलीराम काले ने किया। इस दौरान डॉ. अधिकराव धनाजी जाधव ने रेशम की खेती से ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का सहभागी मॉडल पर अपना पत्र प्रस्तुत किया। वहीं श्रम घटाने पर ई. विनीता कश्यप ने जबकि वर्षा कुमारी ने मक्का प्लांटर और टमाटर में निराई पद्धतियों का एर्गोनॉमिक मूल्यांकन पर अपने विचार प्रस्तुत किये। कपिल कुमार ने समावेशी प्रसार के लिए सहभागी वीडियो टूल पर डिजिटल ग्रीन मॉडल के अनुभव के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
हाशिये से मुख्यधारा तक महिलाओं की एजेंसी :
महिलाएं, नवाचार और तकनीक पर केंद्रित तकनीकी सत्र-3 की अध्यक्षता डॉ. वी.वी. सदामते और कैप्टन डॉ. एल.बी. कलंत्री ने की। इस सत्र में राधा ठाकुर ने “हाशिये से मुख्यधारा तक महिलाओं की एजेंसी” और डॉ. एस.एस. डोली ने “स्टार्टअप्स से महिला सशक्तिकरण” पर अपने विचार रखे। वहीं डॉ. आर.बी. भरसावड़कर ने सिंचाई में एआई और डॉ. अमित कुमार ने आइ.ओ.टी. आधारित मिट्टी नमी निगरानी पर शोध साझा किया।
सतत कृषि के लिए महिलाओं की भूमिका :
इससे पहले 27 जून को उद्घाटन सत्र के बाद “सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों में परिवर्तन वाहक के रूप में महिलाएं” विषयक तकनीकी सत्र-1 की अध्यक्षता डॉ. एम.एम. अधिकारी और डॉ. संगीता देव ने की। जिसमें बैंगलोर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. के. नारायण गौड़ा ने “कृषि में महिलाओं का योगदान” और नेपाल के पूर्व कृषि सचिव डॉ. योगेंद्र कुमार कार्की ने “सतत कृषि के लिए महिलाओं की भूमिका” पर पत्र प्रस्तुत किया।
मिलेट जैव विविधता और ग्लेडियोलस खेती :
जबकि डॉ. एम.एल. मीना ने मुजफ्फरपुर में जलवायु अनुकूलन की बाधाओं और डॉ. निधि ने बिहार में पशुधन-डेयरी में महिलाओं की निर्णय क्षमता पर शोध साझा किया। इसके अलावा महिला एग्री-स्टार्टअप, मिलेट जैव विविधता और ग्लेडियोलस खेती से आजीविका पर भी 15 से अधिक पत्र प्रस्तुत हुए।
महिला केंद्रित प्रसार नीति को मिलेगी मजबूती :
सम्मेलन के दौरान 48 पोस्टर प्रदर्शित हुए। सोमवार को तीसरे दिन नीति गोलमेज के साथ सम्मेलन का समापन होगा। आयोजकों के अनुसार यहां से निकली सिफारिशें कृषि मंत्रालय को भेजी जाएंगी ताकि महिला केंद्रित प्रसार नीति को मजबूती मिले।