
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
पूसा (एनएसबी)। “कृषि क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) तकनीक खेती-किसानी की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एआई आधारित कृषि तकनीकों के माध्यम से अब किसान फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन तथा मौसम आधारित निर्णय अधिक सटीकता के साथ ले पा रहे हैं।”
कृषि का महत्वपूर्ण अंग बनेगा एआई :
केवीके बिरौली प्रमुख डॉ. रविन्द्र कुमार तिवारी ने बुधवार को एआई तकनीक एवं कृषि आधारित किसान गोष्ठी का दौरान उक्त बातें कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि, “आने वाले वर्षों में एआई कृषि का महत्वपूर्ण अंग बनेगा और भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।”
एआई तकनीक के उपयोग की जानकारी :
बताते चलें कि, डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली में एक दिवसीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कृषि में एआई तकनीक के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी गई।
समय पर वैज्ञानिक सलाह :
इस दौरान केन्द्र के उद्यान विशेषज्ञ डॉ धीरू कुमार तिवारी तथा फसल सुरक्षा के वैज्ञानिक सुमित कुमार सिंह ने बताया कि, “खेतों से प्राप्त आंकड़ों, उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण, सेंसर एवं मौसम संबंधी सूचनाओं का विश्लेषण करके एआई किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराता है। इससे फसल की वृद्धि, पोषक तत्वों की आवश्यकता, रोग एवं कीट प्रकोप तथा सिंचाई की सही मात्रा का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।”
फसल क्षति का जोखिम कम :
उन्होंने बताया कि, “मौसम पूर्वानुमान में भी एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अत्यधिक वर्षा, सूखा, ओलावृष्टि या तेज हवा जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों का पूर्वानुमान मिलने से किसान समय रहते आवश्यक कृषि कार्यों की योजना बना सकते हैं। इससे फसल क्षति का जोखिम कम होता है और उत्पादन अधिक सुरक्षित रहता है।”
कृषि में एआई तकनीक :
इस मौके पर वस्तु विषय विशेषज्ञ इंजीनियर विनीता कश्यप तथा फसल उत्पादन वैज्ञानिक भारती उपाध्याय ने कृषि में एआई तकनीक की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।