
ओई नी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के महान साहित्यकारों में मूर्धन्य स्थान रखते हैं। उन्होंने कलम को हथियार बनाकर सामंतवादी एवं शोषणकारी सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध क्रांति का बिगुल फूंकने का कार्य किया था। उनकी कालजयी रचनाएं भारतीय आत्मा को प्रतिबिंबित करती है।”
शुक्रवार को समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) शशि भूषण कुमार शशि ने अपने संबोधन में उक्त बातें कही।
साहित्य जगत उनका हमेशा ऋणी :
उन्होंने कहा कि, मुंशी जी ने भारतीय किसानों, मजदूरों एवं हासिए पर खड़े स्त्रियों एवं पुरुषों के जीवन की पीड़ाओं को रेखांकित कर हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साहित्य जगत उनका हमेशा ऋणी रहेगा।
एक दिवसीय संगोष्ठी :
बताते चलें कि शुक्रवार को समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ महेश कुमार चौधरी ने किया।
शुभारंभ व अभिनंदन :
दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई। तत्पश्चात प्रेमचंद के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस क्रम में आगत अतिथियों का मैथिल परंपरा के अनुसार पुष्पमाला, पाग, चादर एवं पुष्पगुच्छ से अभिनंदन किया गया।
समकालीन प्रासंगिकता :
आमंत्रित मुख्य वक्ता के रूप में अयोध्या प्रसाद सिंह स्मारक महाविद्यालय, बरौनी के हिन्दी विभाग के वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ. नंद किशोर पंडित ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का कथा साहित्य तत्कालीन समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, वर्ग-संघर्ष, स्त्री अस्मिता, आर्थिक विषमता, शोषण और सामाजिक अन्याय जैसे ज्वलंत मुद्दों को सशक्त रूप से सामने लाता है।
मर्यादाओं एवं आदर्शों को जिया :
डॉ. पंडित ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी कथाओं में पात्रों के माध्यम से व्यक्ति, परिवार और समाज की मर्यादाओं एवं आदर्शों को जिया है। वंचित और शोषित वर्ग की पीड़ा एवं अस्मिता के संघर्ष को स्वर दिया है। फलतः उनकी रचनाएं आज भी सामाजिक समानता, मानवीय संवेदना, गरिमा और न्याय की चेतना को मजबूत करती है।
हिन्दी साहित्य जगत को दिया विस्तृत आयाम :
हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ महेश कुमार चौधरी ने कहा कि सामाजिक सरोकार एवं जनजीवन से जुड़ी समस्याओं को विश्व पटल पर जितनी शिद्दत से मुंशी प्रेमचंद ने उकेरा उतनी बारीकी से शायद ही उनके किसी पूर्ववर्ती साहित्यकार ने उकेरा हो। उन्होंने पहली बार कथा साहित्य को कल्पना लोक की चमकीली–चटकीली पृष्ठभूमि से यथार्थ की खुरदरी जमीन पर उतार कर हिन्दी साहित्य जगत को विस्तृत आयाम दिया।
कालजई साहित्यकारों के सिरमौर :
ग्रामीण पृष्ठभूमि में मानवीय संवेदनाओं व लोक व्यवहार को सूक्ष्मता से उकेरते ग्रामीण पात्र, सटीक लोकोक्तियों के बीच पिरोए गए लोक भाषा के शब्द, आदि ने उनकी कथाओं को व्यापकता प्रदान की। जिससे वे सर्व स्वीकार्य कालजई साहित्यकारों के सिरमौर बन गए।
बेजोड़ लेखन प्रतिभा :
डॉ. एस.एम.ए.एस. रजी ने कहा कि भारत का शेक्सपियर कहे जाने वाले प्रेमचंद की लेखन प्रतिभा बेजोड़ थी। उनकी कथाओं के प्रत्येक पात्र, और शब्द पाठक के दिलो–दिमाग पर कब्जा कर लेते हैं और पाठक कथा पात्रों को अपने आसपास महसूस करता है, उनके साथ खुश होता है, उदास होता है, हंसता है रोता है। इतना ही नहीं उन्होंने तत्कालीन सामाजिक व राजनीतिक परिदृश्य को आदर्शोन्मुख यथार्थवाद के माध्यम से चित्रित किया।
इन्होंने भी किया संबोधित :
इस अवसर पर डॉ. अनिल कुमार सिंह, इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. दयानंद मेहता, डॉ. दिनेश्वर राय, डॉ. रोहित प्रकाश, डॉ शालिनी कुमारी भावसिंका, डॉ. चांदनी रानी, डॉ. खुर्शीद आलम, डॉ सुमन कुमार सिन्हा, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. जितेन्द्र प्रसाद आदि ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये।

पुरस्कार, संचालन एवं उपस्थिति :
छात्र-छात्राओं में विषय पर आधारित बेहतरीन विचार रखने वालों में प्रथम स्थान निखिल कुमार, द्वितीय स्थान श्याम कुमार एवं तृतीय स्थान नीतीश कुमार को प्रधानाचार्य के द्वारा मेडल देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन राम कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन रौशन कुमार ने किया। इस अवसर पर नेहा कुमारी, सुमित कुमार, अभिषेक, तनुप्रिया, अनिशा, विवेक आदि उपस्थित थे।