
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के निर्माण का सशक्त आधार है।” संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, में “इंट्रोडक्शन टू इंडियन नॉलेज सिस्टम : दर्शनशास्त्र, स्कोप एंड रिलीवेंस” विषय पर आयोजित शैक्षणिक व्याख्यान के दौरान अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. रोली द्विवेदी ने उक्त बातें कही।
इस क्रम में उन्होंने कहा कि, “शिक्षा में भारतीय चिंतन, नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समावेश समय की आवश्यकता है।”
शैक्षणिक व्याख्यान का उद्देश्य :
बताते चलें कि, जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित स्वायत्त उच्च शिक्षण संस्थान संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, वीरसिंह पुर में प्राचार्य डॉ. द्विवेदी की अध्यक्षता में उक्त शैक्षणिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भावी शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा की दार्शनिक पृष्ठभूमि, व्यापक स्वरूप तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता से परिचित कराना था। अ
एक महत्वपूर्ण पहल :
पने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। का
भारत की ज्ञान परंपरा में विश्व कल्याण का संदेश :
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुमेश नारायण सिंह, विभागाध्यक्ष (बी.एड़.), एच.आर.पी.जी. कॉलेज, एस.के.यू (सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी), सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस क्रम में उन्होंने वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित, दर्शन एवं गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा समग्र मानव विकास, नैतिकता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता तथा विश्व कल्याण का संदेश देती है।
सारगर्भित चर्चा :
उन्होंने प्रशिक्षुओं का आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षण विधियों के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करें।व्याख्यान के दौरान भारतीय संस्कृति, ज्ञान, धर्म, संस्कार, समन्वय तथा समग्र विकास जैसे विषयों पर भी सारगर्भित चर्चा हुई।
भारतीय मूल्यों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण :
इस दौरान प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ द्वारा विस्तारपूर्वक उत्तर दिया गया। अंत में प्राचार्य डॉ. द्विवेदी ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम शिक्षक-प्रशिक्षुओं में शोध, नवाचार तथा भारतीय मूल्यों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
समापन :
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्याख्यान प्रशिक्षुओं के बौद्धिक एवं व्यावसायिक विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर, शोधार्थी एवं बी.एड./डी.एल.एड. के सभी प्रशिक्षु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।