
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
ओईनी 24 समस्तीपुर। दुनिया आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है जहाँ एक तरफ प्रगति के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ महाविनाशकारी महायुद्ध की जलती हुई आग। सामरिक शक्ति के प्रदर्शन और वर्चस्व के इस अंधी दौड़ में ग्लोबल वार्मिंग, कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण जैसी बातें मीलों पीछे छूट गई। ऐसे में तार तार हो रहे मानवता की किसी को फिक्र कहां है।
वैश्विक संकट से व्यथित समस्तीपुर के प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्र सेवा दल (बिहार) के प्रतिनिधि सुरेन्द्र कुमार ने दुनिया के वर्तमान हालात के परिपेक्ष्य में उक्त बातें कही। इस दौरान उन्होंने विकसित देशों के सत्ताधीशों की मंशा पर ही सवालिया निशान छोड़े।
हथियारों की नुमाइश और वर्चस्व विस्तार महाविनाश का आमंत्रण :
श्री कुमार ने वैश्विक राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए बाजारवाद और निरंकुश सत्ता का गठजोड़ घातक बताया। उनके मुताबिक, “आज दुनिया की लोकतांत्रिक सरकारें ‘बाजारवादी मानसिकता वाले स्वार्थी नीति-निर्धारकों‘ की कठपुतली बन चुकी हैं। सत्ता जब जनसेवा के बजाय व्यापारिक मुनाफे और साम्राज्यवादी विस्तार की सोच से ग्रस्त हो जाती है, तो वह ‘निरंकुश’ हो जाती है। आज की सरकारें जिस हथियारों की नुमाइश और वर्चस्व विस्तार को ही राष्ट्रवाद समझ बैठी हैं, जबकि हकीकत में यह महाविनाश का आमंत्रण है।”
दुनिया की शांति और समृद्धि को लील रहा तानाशाही का वायरस :
सुरेन्द्र कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि, “यदि विज्ञान और मानव संकल्प ने प्लेग, पोलियो, चेचक, हैजा और हाल ही में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, तो फिर हम इन ‘बेकाबू तानाशाहों’ और युद्धोन्मादी शासकों से मुक्ति पाने में अक्षम क्यों हैं? तानाशाही किसी वायरस से कम खतरनाक नहीं है, जो पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि को लील रही है।”
युद्ध की भट्टी में झोंकी जा रही युवा ऊर्जा :
इसी क्रम में उन्होंने कहा कि, पूरे प्रकरण में सबसे मर्मस्पर्शी पहलू युवाओं और बच्चों की अनदेखी है।” सुरेन्द्र कुमार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि, ”दुनिया की आधी आबादी असीम ऊर्जा से ओतप्रोत युवाओं की है। लेकिन दुर्भाग्य ही है कि, उनकी आकांक्षाएं किसी भी सरकार के एजेंडे में नहीं हैं। उनकी ऊर्जा को नवीनतम तकनीक और सृजन में लगाने के बजाय युद्ध की भट्टी में झोंका जा रहा है।”
दुनिया में शांति की ‘गारंटी’ जरूरी :
उन्होंने कहा कि, “जब तक दुनिया में शांति की ‘गारंटी’ नहीं होगी, तब तक बचपन बचाओ आंदोलन या बाल शोषण मुक्त भारत की कल्पना साकार नहीं हो सकती। ऐसे में हम बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल यौन शोषण जैसे जघन्य अपराधों को कभी समाप्त नहीं कर पाएंगे। इसलिए अग्रणी देशों को विश्व शांति की गारंटी देनी होगी।”
वैकल्पिक मार्ग – शांति, सद्भाव और गांधीवाद :
श्री कुमार ने शांति, सद्भाव और गांधीवाद को वैकल्पिक मार्ग बताते हुए विश्व के तमाम साम्यवादी, समाजवादी और गांधीवादी विचारधारा के लोगों से अपील की है कि, “वे युद्ध के उन्माद के खिलाफ एकजुट हों।” उन्होंने जोर दे कर कहा कि, “असली ‘सामरिक प्रदर्शन’ हथियारों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षा और संरक्षण के साधन जुटाना होना चाहिए। विश्व को महाविनाश से बचा सकती है।”