
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। बेटी सबको प्यारी होती है। हर मां बाप की ख्वाहिश होती है सुखी संपन्न परिवार में बेटी की शादी किंतु आर्थिक तंगी के चलते कई बार भारी भरकम दहेज की रकम नहीं जुटा पाने सहित विभिन्न कारणों से ऐसा हो नहीं पाता है। कुल मिला कर आज के दौर में बेटी की शादी मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों केलिए सबसे बड़ी चुनौती है।
ऐसे में जिले के ओईनी के उत्साही ऊर्जावान युवाओं ने टीम शहनाई की स्थापना कर गरीबों को बेटी की शादी में भरपूर सहायता की ठानी है। जिसने महज 5–7 वर्षों की अवधि में ओईनी एवं आसपास के क्षेत्र में गरीबों के सपनो और खुशियों का मजबूत सहारा या कहें संजीवनी के रूप में खुद को स्थापित किया है।
इस टीम की एक खासियत अचंभित करती है कि इस टीम के सभी सदस्य अपने स्तर से सारा प्रबन्ध करते हैं। कोई निदेशक नहीं, कोई अध्यक्ष या सचिव नहीं, लोग सुनते हैं और स्वेच्छा से जुड़ते हैं और गरीबों के घर शहनाई की गूंज के सहकार बनते हैं।
असंगठित युवाओं के संगठित प्रयास टीम शहनाई के सूत्रधार सह संयोजक जिले के जाने माने समाजसेवी सह फिजियोथेरेपी चिकित्सक डॉ नीरज कुमार मिश्रा ने बताया कि अब तो दूसरे जिले के बुद्धिजीवी और अनुभवी लोग भी शामिल हो रहे हैँ।
यह टीम प्रत्येक वर्ष उन परिवार को चिंन्हित करती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैँ। बाद में उन्हें आर्थिक और अन्य सहयोग देकर बेटी की शादी कराने में अहम् भूमिका अदा करती है।
इसी क्रम में रविवार को एक ऐसी शादी के दौरान टीम के सदस्य शिक्षक नीलेश कुमार ने कहा कि ये कार्य करके उन्हें बहुत सुकून मिलता है। हम लोग हर वर्ष 5 से 6 बहन बेटियों की शादी करा देते हैँ । जिसमें 70 प्रतिशत तक का खर्च हमारी टीम उठाती है ।
उन्होंने बताया कि इस कार्य में आवश्यकता पड़ने पर समस्तीपुर समाजसेवी जैसे की रविंद्र खत्री और ब्लड फाॅर्स टीम राहुल श्रीवास्तव जैसे समान विचारधारा वाले समाज सेवी भी यथा संभव मदद करते रहते हैँ।
समाजसेवी कुबौली राम के दीपक सिंह भूमिहार, मालिकौर के मवेशी डॉक्टर रूपांकर कुमार, खैरा के अजय कुमार सहनी, ओईनी के समाजसेवी मिथिलेश कुमार राउत, नितेश कुमार, गुलजार अहमद, मेहबूब आलम आदि ने बताया कि अपने सीमित साधनों से इस साल 2025 में उनके टीम के सौजन्य से अबतक 3 शादी कराई जा चुकी है।
संवाददाता से बात करते हुए डॉ मिश्र ने बताया कि एक पुरानी मान्यता है की किसी गरीब के बेटी की शादी करवाने से कई यज्ञ और अनगिनत देवी देवताओं के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही कहा जाता है बेटी सिर्फ व्यक्ति या परिवार नहीं पूरे समाज की जिम्मेदारी होती है। यही मान्यता हमें ऊर्जानवित करती है।
उन्होंने बताया कि इन प्रयासों का उदेश्य सहकारिता आधारित समाज निर्माण करना है जिसमें कोई भेद भाव न हो और सभी एक दूसरे को साथ लेकर चलें ताकि बेटी की शादी के बाद कोई पिता भारी भरकम कर्ज के बोझ से दब कर टूट न जाए।