
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। कर्पूरी ठाकुर का जीवन सिर्फ अभावों और संघर्षों की कहानी नहीं, बल्कि यथार्थ भूमि पर दिखने वाला जीवंत दर्पण है। उन्होंने दलितों में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान एवं अपने अधिकारों के प्रति चेतना जागृत करने का कार्य किया।
भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘दलित चेतना के विकास में कर्पूरी ठाकुर का योगदान‘ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. महेश कुमार चौधरी ने उक्त बातें कही।
इसलिए ‘वे’ जननायक थे :
उन्होंने कहा कि, उन्होंने दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। वे सच्चे अर्थों में दबे–कुचले दलितों के मसीहा एवं शोषित–वंचित वर्ग के महानायक थे, इसीलिए वे जननायक थे। हमें उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए।
संगोष्ठी का आयोजन :
भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102 वीं जयंती के अवसर पर समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में तथा विभागाध्यक्ष डॉ. महेश कुमार चौधरी की अध्यक्षता में ‘दलित चेतना के विकास में कर्पूरी ठाकुर का योगदान‘ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
समाजवाद और सामाजिक न्याय के पुरोधा ‘कर्पूरी ठाकुर’ :
परंपरानुसार दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ आरम्भ संगोष्ठी में उपस्थित लोगों को कर्पूरी ठाकुर के क्रांतिकारी विचार – “अधिकार चाहो तो लड़ना सीखो, पग-पग पर अड़ना–लड़ना सीखो, जीना है तो मरना सीखो” का उल्लेख करते हुए डॉ. चौधरी ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर समाजवाद और सामाजिक न्याय के पुरोधा और क्रांतिकारी विचारधारा वाले सच्चे समाज सेवक थे। इस दौरान उन्होंने स्वरचित कविता – ´भारतरत्न जननायक ` का पाठ किया।
सामाजिक समरसता और नारी सशक्तिकरण के पक्षधर थे कर्पूरी ठाकुर :
इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. अपराजिता राय ने कहा कि, “सादा जीवन उच्च विचार के अनुयायी कर्पूरी ठाकुर हमेशा से सामाजिक समरसता और नारी सशक्तिकरण के पक्षधर थे। उन्होंने नारी सशक्तिकरण हेतु आरक्षण देने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त कर आधिकारिक भाषा के रूप में हिन्दी और उर्दू को लाने में अग्रणी भूमिका निभाई।”
कई प्राध्यापकों ने भी रखें विचार :
इस अवसर पर डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. राहुल मनहर, डॉ. शिवानंद पटेल, डॉ. जितेन्द्र प्रसाद, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. माला यादव, योगेन्द्र राय, शशिशेखर प्र. यादव, विकास कुमार, प्रेमेश पावन, शिव कुमार ने अपना विचार प्रस्तुत किया ।
पुरस्कृत हुए छात्र :
संगोष्ठी में विषयंकित संदर्भ में बेहतरीन विचारों के प्रस्तुतिकरण केलिए प्रथम स्थान निखिल कुमार, द्वितीय स्थान शिवानी कुमारी एवं तृतीय स्थान आशीष कुमार और रौशन कुमार संयुक्त रूप से प्राप्त किया गया। इन प्रतिभागियों को आगामी गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानाचार्य के द्वारा सम्मानित किया जायेगा।
राष्ट्र गान के साथ संगोष्ठी संपन्न :
कार्यक्रम का संचालन पूर्ववर्ती छात्र आशुतोष कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन नवनीत कुमार ने किया। राष्ट्र-गान के साथ संगोष्ठी का समापन किया गया ।