
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
पूसा। अगले 24 घंटों में हल्की वर्षा या बूंदा बूंदी की संभावना को देखते हुए किसान भाई कृषि कार्यों में सर्तकता बरतें। फसलों में कीटनाषक दवाओं का छिड़काव मौसम साफ रहने पर करें। इस अवधि के दौरान सरसों की तैयार फसलों की कटाई सावधानी पूर्वक करें। डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित मौसम विभाग के नोडल पदाधिकारी डाॅ गुलाब ने मौसम परिवर्तन के इस समय में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हुए उक्त बातें कही है।
उन्होंने कहा है कि कुछ दिनों से तापमान में वृद्धि होने के कारण गेहूं की फसल को नुकसान होने की संभावना है। इसलिए किसान भाई अपने खेतों में नमी बनाए रखें ताकि गेहूं की फसल को अधिक तापमान से बचाया जा सके और उत्पादन में कमी न आए।
अरहर की फसल में फल-छेदक कीट की निगरानी करें। इस कीट के पिल्लू अरहर की फलियों में घुसकर बीजों को खा जाते है, जिससे उपज में काफी कमी आती है। इस कीट से बचाव के लिए करताप हाईड्रोक्लोराइड दवा 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिडकाव करें।
गरमा मूंग तथा उरद की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें। बुआई से पूर्व खेत की जुताई में 20 किलोग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम सल्फर, 20 किलोग्राम पोटाष तथा 20 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें। मूंग के लिए पूसा विशाल, सम्राट, एस०एम०एल०-668, एच०यू०एम०-16 एवं सोना तथा उरद के लिए पंत उरद-19, पंत उरद-31. नवीन एवं उत्तरा किस्में बुआई के लिए अनुशंसित है। बीजदर छोटे दानों के प्रभेदों हेतु 20-25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा बड़े दानों के प्रभेदों हेतु 30-35 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। कृषक भाई बुआई पूर्व बीज का प्रबंध प्रमाणित स्त्रोत से सुनिश्चित कर लें।
सुर्यमुखी की बुआई 10 मार्च तक संपन्न कर लें। खेत की जुताई में 100 क्विंटल कम्पोस्ट, 30-40 किलोग्राम नेत्रजन, 80-90 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 40 किलोग्राम पोटास का व्यवहार करे। उत्तर बिहार के लिए सूर्यमूखी की उन्नत संकुल प्रभेद मोरडेन, सूर्या, सी०ओ०-1 आदि अनुसंशित है। संकर किस्मों के लिए बीज दर 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा संकुल किरमों के लिए 8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। बुआई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम धीरम या कैप्टाफ दवा से उपचारित कर बुआई करे।

इस मौसम में प्याज की फसल में थ्रिप्स कीट का आक्रमण हो सकता है। बचाव के लिए मौसम साफ रहने पर प्रोफेनोफॉस 50 ई०सी० दवा का 1.0 नि०ली० प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड दवा का 1.0 मि.ली. प्रति 4 लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें। अच्छे परिणाम हेतु चिपकाने वाला पदार्थ जैसे टीपोल 1.0 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल में मिलावें।
गरमा मौसम की सब्जियों की बुआई करें। 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर खाद की मात्रा पूरे खेत में अच्छी प्रकार विखेरकर मिला दें। कजरा (कटुआ) पिल्लू से होने वाले नुकसान से बचाव हेतु खेत की जुताई में क्लोरपायरीफॉस 20 ई०सी० दवा का 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से 20-30 किलो बालू में मिलाकर व्यवहार करें। सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई करें।

मार्च महीने में गर्मी बढ़ने से दुधारू पशुओं में थनैला बिमारी होने की संभावना रहती है। धनों एवं दूध के रंग में बदलाव या अचानक दूध उत्पादन में कमी होने पर मैमिडियम 50 ग्राम चार दिनों तक प्रतिदिन गुड़ के साथ दें एवं तुरंत उपचार करवाएं। खरीफ के हरा चारा के लिए एम.पी चरी. मल्टीकट मिठा ज्वार एवं मक्का के साथ लोविया या मेथ दलहनी चाए लगाए। खुरहा, गलघोटू एवं लंगड़ी बिमारी से बचाव के लिए टिकाकरण करें।
