
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर । बच्चे उच्छृंखल हो रहे हैं, इसकेलिए एकल परिवार आधारित सामाजिक ढांचा अधिक जिम्मेदार है। संयुक्त परिवार के दौर में यह सामाजिक ढांचा बेहद सशक्त था, लोग एक दूसरे से जुडाव महसूस करते थे, पडोसियों व परिचितों के प्रति भी बच्चों में आदर व सम्मान का भाव होता था। ऐसे में सोशल गार्जियनशिप कहें या सामाजिक अभिभावकत्व अघोषित रूप से सर्व स्वीकार्य था।
आज संयुक्त परिवार की अवधारणा के बिखडने के कारण वक्त के साथ-साथ पता नहीं कब सोशल गार्जियनशिप का कनसेप्ट ही लुप्त हो गया है। जिसका प्रतिफल है कि आज छोटी कक्षा के बच्चे भी अनुशासनहीन व उच्छृंखल हो रहे हैं। शुक्रवार को सिटी सेंट्रल स्कूल की मोहनपुर शाखा में आयोजित शिक्षक अभिभावक मीट के दौरान निदेशक संजीव कुमार पाण्डेय ने उक्त बातें संवाददाता से उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि इसका सबसे बडा नुकसान है कि बचपन से ही बच्चों में पडोसियों एवं समाज का डर खत्म हो गया है। श्री पाण्डेय ने कहा कि याद कीजिए आज से करीब 25-30 साल पुर्व का दौर, कक्षा से भाग कर भटकने, या स्कूल नहीं जाने पर घर के लोगों तक बात पहुंचने के पहले कई लोग डांट चुके होते थे। ये डांटने वाले घर या परिवार से नहीं होते थे, वे पडोसी, या कोई अन्य परिचित होते थे। आज यही चीज लुप्त हो गया है।
बताते चलें कि शुक्रवार को आयोजित अभिभावक शिक्षक मीट के दौरान बच्चों की प्रगति के बारे में अभिभावकों से फीड बैक लिया जा रहा था। इस अवसर पर श्री पाण्डेय ने कहा कि बच्चे स्वभाव से निश्छल व निष्कपट होते हैं। वे नहीं जानते कि झूठ क्या होता है। वे सहज भाव से डर के कारण अपनी गलती छिपाने की चेष्टा करते हैं। इसकेलिए आम तौर पर उन्हें पीट दिया जाता है। यह गलत है।
यदि उन्हें बाल सुलभ माहौल दे कर उनके झूठ बोलने के कारण का पता लगाया जा सके और उनके कारण का सहज व सरल तरीके से निवारण कर दिया जाए तो वे भविष्य में फिर झूठ नहीं बोल सकेंगे।
इस दौरान बच्चों की प्रगति पर अभिभावक व शिक्षक परस्पर संवाद से संतुष्ट दिखे। मौके पर वरिष्ठ प्राचार्य चिरंजीत कुमार ठाकुर, मोहनपुर शाखा की प्राचार्य मुल्लाथारा कविता करुणाकरण, सहित सभी शिक्षक व अभिभावक मौजूद थे।