
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। देवउठनी एकादशी से शुरू होने वाले शादी-विवाह के मौसम के मद्देनजर जिले में बाल विवाह के खिलाफ मुहिम चला रहे गैरसरकारी सामाजिक संगठन जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ने जिला प्रशासन व जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डीएलएसए) से बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी और अत्यधिक सतर्कता बरतने का अनुरोध किया है।
शनिवार को प्रेस वार्ता के दौरान इस बाबत जानकारी देते हुए राइट टू जस्टिस की कार्यक्रम समन्वयक दीप्ति कुमारी ने बताया कि संगठन ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में हमने बाल विवाहों की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए कड़ी चौकसी की अपील की है। ताकि ऐसी कोई भी घटना प्रशासन की जानकारी से ओझल नहीं रह सके और तत्काल कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि समस्तीपुर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने में समाज और प्रशासन के समेकित प्रयास की भूमिका अहम है। इसलिए जन-जन तक यह संदेश पहुंचाना आवश्यक है कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास किसी संभावित बाल विवाह की जानकारी है तो वह तत्काल पुलिस हेल्पलाइन (112), चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) या स्थानीय थाने को सूचित करे ताकि इस अपराध को रोका जा सके।
सुश्री दीप्ति ने कहा कि बाल विवाह सामाजिक कोढ़ की तरह है जो स्वस्थ, सशक्त एवं आत्मनिर्भर समाज निर्माण में बाधक है। इसलिए संगठन ने एक नवंबर से शुरू हो रहे शादी- ब्याह के मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन से सरपंचों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्देश देने की अपील की है।
इसके साथ ही संगठन ने आज से ही गांवों और स्कूलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान को गति देने का फैसला करते हुए धार्मिक नेताओं से भी इस मौके पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।
इस अवसर पर जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के सचिव सुरेंद्र कुमार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के अपने ऐतिहासिक फैसले में जिलों को बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्क रहने को कहा है। हम जिला प्रशासन से सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों पर अमल की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने भी वर्ष 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लक्ष्य के साथ 27 नवंबर 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी। आज हम बाल विवाह के खात्मे के मुहाने पर खड़े हैं। अब जबकि एकबार फिर शादी–ब्याह का सिलसिला शुरू होने वाला है तो यह एक अहम समय है जब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एक भी बाल विवाह नहीं होने पाए।
श्री सुरेंद्र ने कहा कि जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। संगठन भारत सरकार की ओर से पिछले साल शुरू किए गए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के नक्शेकदम पर पिछले कई वर्षों से जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए लगातार जमीनी प्रयास कर रहा है।
इसकेलिए सुरक्षा, बचाव व अभियोजन मॉडल पर अमल करते हुए स्कूलों, समुदायों व गांवों में जागरूकता अभियान चला जा रहा है। बाल विवाह के खिलाफ आंदोलन में धार्मिक नेताओं को जोड़ा जा रहा है और अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ करीबी सहयोग से काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि हमने जिला प्रशासन को सभी सरपंचों को यह निर्देश देने को कहा है कि वे अपने गांव में होने वाले सभी विवाहों पर नजर रखें। साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देशित करें कि ऐसे विवाहों की सूची तैयार करें। स्कूलों को भी सतर्क किया जाए कि इन दिनों अगर कोई बच्चा अनुपस्थित है तो वे इसकी वजह पता करें क्योंकि उनकी अनुपस्थिति का कारण बाल विवाह हो सकता है।
दूसरी तरफ संगठन ने सभी धार्मिक नेताओं और विवाह समारोह में टेंट, सजावट या बैंड बाजा मुहैया कराने वाले सेवा प्रदाताओं से अनुरोध किया है कि वे सुनिश्चित करें कि वे किसी भी बाल विवाह का हिस्सा नहीं बनेंगे।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 के अनुसार जो भी किसी भी तरह से बाल विवाह में भागीदारी करता है, सेवाएं प्रदान करता है, या इसे संपन्न या निर्देशित करता है, उसे दो साल का सश्रम कारावास और एक लाख रुपए जुर्माना या दोनों हो सकता है।