
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। गुरुवार को समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी रौशन कुशवाहा की अध्यक्षता में जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर एक विस्तृत समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आगामी जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि डिजिटल भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस बैठक में जिले के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, प्रभारी अधिकारियों, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को जनगणना के बहुआयामी अवयवों पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
1. द्वि-चरणीय गणना प्रक्रिया :
बैठक में जानकारी दी गई कि जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी:
प्रथम चरण मकान सूचीकरण : इसमें प्रत्येक भवन और मकान की विशिष्ट पहचान (Mapping) की जाएगी। साथ ही, परिवार के जीवन स्तर से जुड़े 34 महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे, जैसे- मकान की बनावट, पेयजल के स्रोत, और अन्य भौतिक संसाधन।
द्वितीय चरण जनसंख्या गणना : इसमें प्रत्येक व्यक्ति का जनसांख्यिकीय विवरण जैसे- आयु, वैवाहिक स्थिति, साक्षरता और व्यवसाय का डेटा एकत्र किया जाएगा।
2. ‘डिजिटल फर्स्ट’ और स्व-गणना :
इस दौरान श्री कुशवाहा ने कहा कि, इतिहास में पहली बार, जनगणना को पूरी तरह पेपरलेस बनाया गया है। हम यह भी कह सकते हैं कि यह जनगणना डिजिटल इंडिया का आधिकारिक शंखनाद है।” जिलाधिकारी ने इसके तीन तकनीकी पहलुओं पर जोर दिया:
मोबाइल एप्लिकेशन : प्रगणक अपने स्मार्टफोन पर विशेष रूप से निर्मित ऐप के जरिए डेटा प्रविष्टि करेंगे।
स्व-गणना का विकल्प : नागरिक स्वयं के मोबाइल या कंप्यूटर से जनगणना पोर्टल पर जाकर अपने परिवार का विवरण भर सकेंगे।
सत्यापन एवं समय की बचत : जो परिवार ‘स्व-गणना’ का विकल्प चुनेंगे, प्रगणक उनके घर जाकर केवल ‘रेफरेंस कोड’ का मिलान करेंगे, जिससे लंबी पूछताछ की आवश्यकता नहीं होगी और अनावश्यक समय की बर्बादी से बचा जा सकेगा।
3. भौगोलिक सीमांकन और जीआईएस (GIS) मैपिंग :
उन्होंने बताया कि, “क्षेत्रीय त्रुटियों को शून्य करने के लिए जिले के प्रत्येक चार्ज और वार्ड को डिजिटल मैप से जोड़ा गया है। प्रत्येक एन्यूमरेशन ब्लॉक (EB) की सीमाएं डिजिटल रूप से निर्धारित हैं।” ताकि जिले का कोई भी दुर्गम इलाका या नव-निर्मित कॉलोनी गणना से न छूट जाए।
4. डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की गारंटी :
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि, “डिजिटल रूप से एकत्र किया गया डेटा पूरी तरह इन्क्रिप्टेड होगा।डेटा का उपयोग केवल भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण के लिए सांख्यिकीय आधार पर किया जाएगा।”
प्रशिक्षण की गुणवत्ता : इस दौरान प्रशिक्षकों को निर्देश दिया गया कि, वे प्रगणकों को तकनीकी रूप से इतना सशक्त करें कि फील्ड में किसी भी प्रकार का ‘सर्वर एरर’ या ‘डेटा लैप्स’ न हो।
सटीक सत्यापन : सुपरवाइजरों को निर्देश दिया गया कि वे प्रगणकों द्वारा भरे गए डेटा का रैंडम फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) करें।
जागरूकता अभियान : प्रखंड स्तर पर विशेष जागरूकता शिविर लगाने के निर्देश दिए गए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी ‘स्व-गणना’ के प्रति प्रेरित हों।
मौके पर उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह, अपर समाहर्ता-सह-जिला जनगणना अधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी-सह-अपर जिला जनगणना अधिकारी, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-चार्ज पदाधिकारी, प्रगणक, पर्यवेक्षक एवं मास्टर ट्रेनर उपस्थित थे।