
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम ‘सुरक्षित शनिवार’ को प्रभावी बनाने की पहल के तहत बिहार शिक्षा परियोजना, समस्तीपुर और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को जिला स्तरीय मास्टर प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। विद्यालयों में आपदा से बचाव और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सुरक्षित शनिवार से सुरक्षित विद्यालयों की ओर, विषयक इस प्रशिक्षण सह कार्यशाला का उद्घाटन उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह ने किया। इसमें जिले के सभी प्रखंडों से नामित शिक्षक शामिल हो रहे हैं।
स्वागत एवं उद्घाटन :
उद्घाटन सत्र में उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह के साथ जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना जमालुद्दीन, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सर्व शिक्षा अभियान शुभम कसौधन, यूनिसेफ के आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ राजीव कुमार, शिक्षा विशेषज्ञ बसंत कुमार सिंह, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के राज्य सलाहकार अशोक कुमार शर्मा, लेखा पदाधिकारी सुनील कुमार और मीडिया समन्वयक हरिश्चंद्र राम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला की शुरुआत की। इससे पूर्व डीपीओ एसएसए शुभम कसौधन ने अतिथियों और मुख्य प्रशिक्षकों का पौधा भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन सुभीत कुमार सिंह ने किया।
सुरक्षित शनिवार’ को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने की जरुरत :
प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह ने विद्यालयों में सुरक्षा संबंधी गतिविधियों को गंभीरता से लागू करने और बच्चों को आपदाओं से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देने पर जोर दिया। उन्होंने प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को विद्यालयों तक पहुंचाने और ‘सुरक्षित शनिवार’ को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई।
विद्यालयों में सुरक्षा की संस्कृति विकसित करना जरूरी :
डीपीओ एसएसए शुभम कसौधन ने कहा कि, बच्चों को आपदाओं से बचाव के प्रति जागरूक करना और विद्यालयों में सुरक्षा की संस्कृति विकसित करना जरूरी है। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को इस दिशा में सक्षम बनाना है, ताकि कार्यक्रम का संचालन केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यालय स्तर पर सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का नियमित क्रियान्वयन हो सके।
जोखिम पहचान से आपदा प्रबंधन योजना तक की तैयारी :
कार्यशाला में विद्यालयों में फोकल शिक्षकों और बाल प्रेरकों के चयन, विद्यालय आपदा प्रबंधन समिति के गठन तथा संभावित खतरों की पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत फोकल शिक्षक और बच्चों के सहयोग से ‘हैजार्ड हंट’ गतिविधि के माध्यम से विद्यालय परिसर में मौजूद संभावित जोखिमों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर विद्यालय आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
अनुश्रवण सुनिश्चित करने में इन शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण :
साथ ही, प्रत्येक शनिवार निर्धारित सुरक्षा गतिविधियों के संचालन और उनसे संबंधित आंकड़ों को ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम की समीक्षा में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए नोडल शिक्षकों और मास्टर प्रशिक्षकों को अपने-अपने प्रखंडों के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यक्रम के क्रियान्वयन में सहयोग करना है। जिले के सभी प्रखंडों से छह-छह शिक्षकों को नोडल शिक्षक एवं मास्टर प्रशिक्षक के रूप में नामित किया गया है। प्रशिक्षण के बाद विद्यालयों में कार्यक्रम के नियमित संचालन और प्रखंड स्तर पर अनुश्रवण सुनिश्चित करने में इन शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
प्रशिक्षण सत्र में यूनिसेफ के राज्य समन्वयक एवं मुख्य प्रशिक्षक डॉ. पल्लव कुमार, सारण के राज्य प्रशिक्षक संदीप कुमार, मुंगेर के नवनीत कुमार विमल तथा समस्तीपुर के सुभीत कुमार सिंह, मंगलेश कुमार, सदफ नाज और मिन्की कुमारी ने विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया।