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Home » छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम कर ’डिजिटल खेती’ बदलेगी कृषि की तस्वीर : कुलपति

छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम कर ’डिजिटल खेती’ बदलेगी कृषि की तस्वीर : कुलपति

विकसित भारत @2047 के लिए डिजिटल कृषि का रणनीतिक रोडमैप’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू
Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar05/10/2026Updated:05/10/2026No Comments2 Mins Read
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संबोधित करते कुलपति व अन्य।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 पूसा। खेती में अब डिजिटल तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने की जरूरत है। डिजिटल कृषि से छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम करने और उन्हें बाजार से सीधे जोड़ने में मदद मिल सकती है। हालांकि, तकनीक के विस्तार के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीण क्षेत्र और छोटे किसान डिजिटल सुविधा से वंचित न रहें।

कार्यशाला का उद्देश्य :

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विद्यापति सभागार में कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी रोपड़ और अन्नामलाई के संयुक्त तत्वावधान में ‘विकसित भारत @2047 के लिए डिजिटल कृषि का रणनीतिक रोडमैप’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही। इस क्रम में उन्होंने कहा कि एआई, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, जीआईएस और बिग डेटा जैसी तकनीकों को प्रयोगशाला से निकालकर किसानों के खेतों तक पहुंचाना कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य है।

डिजिटल तकनीक से ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत :

कार्यशाला के पहले दिन अतिथियों के स्वागत सम्मान और उद्घाटन की औपचारिकता के पश्चात कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने कृषि में डिजिटल नवाचार को समय की जरूरत बताते हुए आरपीसीएयू के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

150 से अधिक कृषि वैज्ञानिक, एग्री-स्टार्टअप प्रतिनिधि और विद्यार्थी हो रहे शामिल :

अभियंत्रण महाविद्यालय के डीन डॉ. आर. सुबैया और अनुसंधान निदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने भी डिजिटल तकनीक, डेटा आधारित खेती और सटीक कृषि की उपयोगिता पर विचार रखे। कार्यशाला के संयोजक डॉ. एस.के. पटेल ने स्वागत किया, जबकि डॉ. विशाल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालन डॉ. श्रेया गुप्ता ने किया। कार्यशाला में जलवायु अनुकूल खेती, संसाधन एवं फसल प्रबंधन, बागवानी और कृषि-व्यवसाय से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इसमें देशभर से 150 से अधिक कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, एग्री-स्टार्टअप प्रतिनिधि और विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।

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Annamalai College of Agricultural Engineering and Technology Dr. A.K. Singh Dr. P.S. Panday Dr. R. Subbaiya Dr. Rajendra Prasad Central Agriculture University Pusa Dr. S.K. Patel Dr. Shreya Gupta Dr. Vishal Kumar IIT Ropar Prof. Vivekanand Singh Purnea University
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