
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित व सतत राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में 25 और 26 सितंबर को नीति आयोग के समन्वय से राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित होने जा रही है। नीति आयोग के ‘स्टेट सपोर्ट मिशन’ के तहत आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य विषय ‘ग्रीन माइंड्स फॉर ए ग्रीन नेशन: एग्री-एजुकेशन एंड स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047’ रखा गया है। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, और उनके प्रतिनिधि, नीति निर्माता, एग्री-टेक उद्यमी वैज्ञानिक छात्र और शामिल होंगें।
शिक्षा मंत्री एवं कृषि मंत्री बिहार होंगे शामिल :
इस बाबत जानकारी देते हुए सूचना पदाधिकारी डॉ. कुमार राज्यवर्धन ने बताया कि, कार्यशाला के पहले दिन 25 सितंबर को उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी होंगे। इस दौरान नीति आयोग के कृषि सदस्य प्रो. के.वी. राजू, आयोग की परियोजना निदेशक डॉ. नीलम पटेल और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय कृषि शिक्षा के भावी रोडमैप पर अपनी बात रखेंगे। वहीं, 26 सितंबर को आयोजित समापन सत्र में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला के निष्कर्षों को साझा करेंगे।
बनी 15 से अधिक कमिटियां :
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पांडेय ने इस कार्यशाला के सफल आयोजन केलिये पंद्रह से अधिक कमिटी बनाई है जिसमें पचास से अधिक वैज्ञानिक और पदाधिकारी शामिल किये गये हैं। कुलपति स्वयं सभी कमिटी के कार्यो की निगरानी कर रहे हैं। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रितंभरा सिंह इस कार्यशाला की संयोजक बनाई गई हैं।
बनेगी ठोस रणनीतियां :
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में आधुनिक कृषि जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने की रूपरेखा तय होगी। जिसमें कृषि पाठ्यक्रमों में ग्रीन स्किल्स, ड्रोन संचालन, रिमोट सेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रिसिजन फार्मिंग को शामिल करने पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे। साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर एग्री-इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित करने, बायो-इनपुट, कचरा प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी आधारित एग्री-स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए ठोस रणनीतियां बनाई जाएंगी।
शामिल होंगे आईटीसी, नाबार्ड और उद्योग संघों के प्रतिनिधि :
इसके अलावा प्राकृतिक खेती, कार्बन फार्मिंग और जैव विविधता संरक्षण को व्यावहारिक शिक्षा का हिस्सा बनाने पर भी चर्चा होगी। दूसरे दिन उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय पर विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें आईटीसी, नाबार्ड और उद्योग संघों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके अलावा देश के विभिन्न प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयोंं के कुलपति ग्रीन स्किलिंग के तहत अपने-अपने संस्थानों के सफल प्रयोगों को साझा करेंगे।
विशेषज्ञों की राय :
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यशाला देश की कृषि शिक्षा को पर्यावरण के अनुकूल, रोजगारपरक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने में मील का पत्थर साबित होगी।