
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। कृषि शिक्षा सिर्फ किताबों और लैब तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब तक हमारे वैज्ञानिक और छात्र खुद खेत में नहीं उतरेंगे, तब तक ‘लैब टू लैंड’ का सपना पूरा नहीं होगा। ऐसे में विश्वविद्यालय के हर अनुसंधान को सीधे किसान के खेत और उसकी आमदनी से जोड़ने का लक्ष्य भी अधूरा ही रह जाएगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य :
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्रायोगिक फार्म में शनिवार को धान रोपाई मिलन कार्यक्रम के दौरान कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि, “इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को प्रयोगशाला से बाहर खेत की वास्तविक परस्थितियों से जोड़ना है।”
वैज्ञानिक तरीके से धान रोपनी का लिया प्रशिक्षण :
बताते चलें कि, शनिवार को डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में अदभुत व अनोखा नजारा देखने को मिला। जब विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने वैज्ञानिकों और छात्रों के साथ स्वयं खेत में उतरकर धान की रोपनी की। इस दौरान छात्रों ने पैडलिंग, ले-आउट डिजाइनिंग और वैज्ञानिक तरीके से रोपनी का प्रशिक्षण लिया।
कृषि वैज्ञानिक व उद्यमी बनने का मंच :
इस अवसर पर डीन पीजीसीए डॉ. राय ने कहा कि कुलपति डॉ पांडेय के निर्देश पर आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के लिए कौशल विकास का बेहतरीन मंच है। रोपनी, खेत की तैयारी और पौधों की दूरी जैसे हर चरण का व्यावहारिक अनुभव उन्हें भविष्य में बेहतर कृषि वैज्ञानिक और उद्यमी बनने में मदद करेगा। आगे भी हम ऐसे फील्ड आधारित कार्यक्रम चलाते रहेंगे।
जलवायु स्मार्ट कृषि के लिए होंगे तैयार :
इस अवसर पर धान वैज्ञानिक डॉ नीलांजय ने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक प्रदर्शन से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे जलवायु-स्मार्ट खेती के लिए वे बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। मौके पर धान वैज्ञानिकों की टीम और बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।