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Home » मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल धारण क्षमता सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में बेहद कारगर हैं वर्मी कम्पोस्ट : डॉ. प्रदीप

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल धारण क्षमता सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में बेहद कारगर हैं वर्मी कम्पोस्ट : डॉ. प्रदीप

कृषि विज्ञान केन्द्र, जाले, दरभंगा में तीन दिवसीय वर्मी कम्पोस्ट प्रशिक्षण संपन्न 
Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar03/07/2026Updated:03/07/2026No Comments3 Mins Read
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प्रशिक्षण लेते किसान।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 जाले (दरभंगा)। किसानों को जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करने और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से आयोजित कृषि विज्ञान केंद्र, जाले, दरभंगा में ‘वर्मीकम्पोस्ट बनाने’ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. दिव्यांशु शेखर, के संरक्षण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया।

ट्राइकोडर्मा एवं पैसाइलोमिसस से लाभ :

इस कार्यक्रम में उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने जिला दरभंगा के गांव मजरा, जोगियारा से आये 50 किसानों को केंचुआ खाद बनाने की वैज्ञानिक विधि का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि, “वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल धारण क्षमता सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में बेहद कारगर है। वर्मी कंपोस्ट में ट्राइकोडर्मा एवं पैसाइलोमिसस के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार होता है।”

आइसीनिया फेटिडा’ का उपयोग :

केंद्र की वैज्ञानिक ई० निधि कुमारी ने गोबर, सूखी पत्तियां, फसल अवशेष, सब्जियों के छिलके और केंचुए की प्रजाति के ‘आइसीनिया फेटिडा’ का उपयोग करके गड्ढा या बेड विधि से खाद तैयार करने, तथा नमी और तापमान नियंत्रण के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

खेती में लागत कम :

इस क्रम में उन्होंने बताया कि, “45-50 दिन में तैयार होने वाला यह खाद बाजार में 8-10 रुपये प्रति किलो बिकता है। इससे खेती में लागत घटती है और किसानों को आमदनी बढ़ती है। रासायनिक खाद के महंगे होने से महंगी हो रही खेती की इस दौर में केंचुआ खाद एक मजबूत विकल्प है। इससे खेती में लागत कम होगी तो मुनाफा बढ़ेगा और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।”

अपशिष्ट का प्रबंधन :

कार्यक्रम सहायक, प्रयोगशाला शशिमाला कुमारी ने मिट्टी जांच की विधि एवं नमूना लेने की तकनीक की विस्तृत जानकारी दी। अपने संबोधन में डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत ऐसे प्रशिक्षण गांव-गांव दिए जा चुके हैं और सभी प्रशिक्षित किसानों को केंचुए और वर्मी बेड भी उपलब्ध कराये गए हैं। जिससे वह घर और पशुओं के अपशिष्ट का प्रबंधन कर सके और वर्मी कंपोस्ट बनाकर खेत में फसल के लिए इस्तेमाल कर सके और बेचकर पैसे भी कमा सके।

प्रशिक्षण लेते किसान 2।

भंडारण और खेत में प्रयोग :

प्रशिक्षण के दौरान प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ चन्दन कुमार, ने किसानों को कम बजट में पक्के फर्श वाली वर्मी कंपोस्ट इकाई निर्माण, केंचुओं के सही रख–रखाव एवं कंपोस्ट निर्माण के उपरांत वर्मी कंपोस्ट को छानने से लेकर भंडारण और खेत में प्रयोग करने तक की विस्तृत जानकारी दी।

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Dr. Dibyanshu Shekhar Dr. Pradip Kumar Krishi Vigyan Kendra Jale
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