
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “मानसून की कमजोर स्थिति को देखते हुए ऊँची जमीनों में धान की खेती न करें। जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है, वे मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों जैसे राजेन्द्र नीलम्, राजेन्द्र भगवती, राजेन्द्र सरस्वती एवं राजेन्द्र श्वेता का बिचड़ा बीजस्थली में गिरा सकते हैं। बीजस्थली में पर्याप्त नमी बनाए रखने तथा पौधों को सूखने से बचाने के लिए आवश्यकता अनुसार जीवनरक्षक सिंचाई करें।”
वैकल्पिक फसल पर विचार उपयुक्त :
जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के आलोक में कृषि विशेषज्ञों ने किसान भाइयों केलिए जारी सुझाव में उक्त बातें कही है। उन्होंने कहा है कि, वर्तमान कमजोर मानसूनी परिस्थितियों को देखते हुए विशेषकर ऊँचास जमीन में धान के बदले वैकल्पिक फसलों की खेती पर भी विचार करना अधिक उपयुक्त होगा।
खरीफ सब्जियों में करें निकाई–गुड़ाई :
किसानों को भिंडी, कडू खीरा, नेनुआ, करेला एवं लौकी जैसी खरीफ (बरसाती) सब्जियों की बुआई करने की सलाह दी जाती है। सब्जी की फसलों में खरपतवार नियंत्रण हेतु नियमित निराई-गुड़ाई करें, जिससे फसलों की वृद्धि एवं विकास बेहतर हो सके।
जल निकासी की रखें व्यवस्था :
फसलों में पत्ती खाने वाली सुडियों एवं फल छेदक कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर साफ मौसम में डाइमेथोएट 30 ई.सी. का 1-1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। आवश्यकता अनुसार 5-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तथा खेत में उचित जल निकास की व्यवस्था बनाए रखें।
मक्का, हल्दी और प्याज की खेती :
खरीफ मक्का की बुआई करते चलें। उत्तर बिहार के लिए शक्तिमान 2. शक्तिमान 5. शक्तिमान 6 एवं राजेन्द्र शंकर मक्का-3 किस्मों की बुआई करें। हल्दी की बुआई जारी रखें। राजेन्द्र सोनिया एवं राजेन्द्र सोनाली किस्मों की बुआई करें तथा बीज प्रकंदों को डाइथेन एम-45 एवं बाविस्टिन से उपचारित करें। खरीफ प्याज की नर्सरी तैयार करें। एग्री फाउंड डार्क रेड (ADR), एन-53, भीमा सुपर एवं अर्का कल्याण किस्मों के बीजों की व्यवस्था करें।
लीची के बगीचों की देखभाल :
लीची की फल तुड़ाई के बाद बगीचों में आवश्यक छंटाई (प्रूनिंग) कर लें, जिससे पेड़ों के भीतर पर्याप्त धूप एवं हवा का संचार हो सके। साथ ही, बगीचे में गिरे हुए पत्तों, सूखी शाखाओं एवं अन्य पौध अवशेषों को एकत्र कर हटा दें। इससे कीट एवं रोगों के प्रकोप में कमी आएगी तथा पेड़ों की स्वस्थ वृद्धि एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा।
दुधारू पशुओं का रख–रखाव :
दुधारू पशुओं को तापीय तनाव से बचाने हेतु छायादार एवं हवादार स्थानों पर रखें तथा उन्हें पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ एवं ताजा पेयजल उपलब्ध कराएँ। दुग्धारू पशुओं को संक्रामक रोगों से सुरक्षित रखने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार आवश्यक टीकाकरण एवं निवारक उपाय अवश्य करें।
तैयार फसलों का भंडारण :
वर्तमान गर्म एवं शुष्क मौसम को देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि रबी मक्का एवं गरमा मूंग की कटी हुई उपज को भंडारण से पूर्व अच्छी तरह सुखा लें तथा उसे सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर रखें।