
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । यह सांसद भी अन्य सांसदों की तरह निकली। फर्क सिर्फ यह रहा कि पुर्व के सांसद सदन में उंघते रहते थे। मगर ये आये दिन उटपटांग व हास्यास्पद ही सही मगर बयान देती रहती हैं। उक्त बातें भाकपा माले पूसा प्रखण्ड सचिव अमित कुमार ने शुक्रवार को संवाददाता से कही। वे पिछले दिनों सांसद शांभवी चौधरी द्वारा समस्तीपुर स्टेशन का नाम जननायक देशरत्न कर्पूरी ठाकुर के नाम पर रखने की मांग किए जाने पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।



माले नेता ने कहा कि ऐसा कर उन्होंने अपनी योग्यता का परिचय दिया है। जो यह बताता है कि इन्हें समस्तीपुर के बारे में कुछ नहीं पता है। माले नेता ने कहा कि उनको तो यह भी नहीं पता कि समस्तीपुर ने देश को क्या दिया है। यह वह धरती है जिसने एक मजदूर नेता को जार्ज फर्नांडीस बना दिया।



यहां के बाबू सत्यनारायण सिंह प्रिंस ऑफ पार्लियामेंट कहे जाते थे। शारदा सिन्हा की आवाज ने देश ही नही विदेश में भी लोगों को रिझाया। कविवर आरसी प्रसाद सिंह, उदयनाचार्य, आदि भी इसी धरती समस्तीपुर के ही थे। इसके अलावा भी ऐसे कई उदाहरण हैं। ये कहती हैं समस्तीपुर को उन्होंने पहचान दिलाई। ऐसे में उनसे क्या उम्मीद की जाय।



विगत कुछ महीनो में उनकी गतिविधियों से यह लोग समझ गये कि यह भी सस्ती लोकप्रियता पाने वाली नेत्री है। श्री अमित ने कहा कि पढी-लिखी, समाजसेवा से राजनीति में आई युवा सांसद पा कर लोग बेहद उत्साहित थे। लोगों को उम्मीद थी कि ये वादे कम और काम अधिक करेंगी। मगर बहुत जल्दी लोगों का भ्रम दूर हो गया। जब उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि समस्तीपुर को लोग मेरे सांसद बनने के बाद जानने लगे हैं। ये भी भाजपा के रंग में रंगी दिख रही हैं। जिसे जनता की जरूरत से कोई मतलब ही नहीं होता। केवल लंबी लंबी हांकना जानते हैं।



कर्पूरी जी के नाम पर विश्वविद्यालय, जुट मिल का स्थाई समाधान, क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योग आदि कई मुद्दों पर वे सदन में मजबूती से आवाज उठा सकती थी। मगर ऐसा आज तक नहीं हुआ है।
दूसरे नेता के कार्य को अपनी उपलब्धि बता कर क्रेडिट लेने से ज्यादा कुछ करती नहीं दिख रहीं। क्षेत्र की जनता को उनके कथनी और करनी में अंतर दिखने से बेहद निराशा हुई है। वे खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं।
