‘वृद्ध आबादी: महत्वपूर्ण मुद्दे, चुनौतियाँ और समाधान’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आरंभ,

ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। वृद्धजन परिवार या समाज पर बोझ नहीं बल्कि ज्ञान, अनुभव और जीवन की समझ का एक मूल्यवान भंडार हैं, जो परिवार और समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए युवाओं को अपने वृद्ध माता-पिता के प्रति सम्मान, सहानुभूति और जिम्मेदारी की भावना रखनी चाहिए।
वृद्धावस्था के दौर से सबको गुजरना है :
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, स्थित सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के मानव विकास और परिवार अध्ययन विभाग ने “वृद्ध आबादी: महत्वपूर्ण मुद्दे, चुनौतियाँ और समाधान” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। युवाओं को बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील होने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि, “हम सभी को यह हकीकत आत्मसात करने की जरूरत है कि, वृद्धावस्था के दौर से सबको गुजरना है।”
परिवार छोटे होते जा रहे :
बताते चलें कि, मंगलवार को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के एचडीएफएस विभाग में अतिथियों के स्वागत अभिनंदन एवं अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन के साथ आरम्भ इस दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. पी.एस. पांडे ने कहा कि, वैश्वीकरण और आधुनिकता की आड़ में हम इतने शॉर्ट टेंपर्ड और व्यस्त हो गए हैं कि पारिवारिक व समाजिक मान्यताओं व परंपराओं के साथ–साथ सामाजिक व पारिवारिक संरचनाएं भी धीरे-धीरे टूट रही हैं। फ़लतः वसुधैव कुटुंबकम् वाले देश में परिवार छोटे होते जा रहे हैं।
तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता :
कुलपति डॉ पांडेय ने कहा कि, “युवा पीढ़ी अपने व्यस्त जीवन के कारण अपने दादा–दादी की छोड़िए वृद्ध माता-पिता की भी देखभाल करने में कई बार असमर्थ हो रही है। यह समस्या आने वाले वर्षों में और भी गंभीर होने वाली है। एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक देश में वृद्धों की संख्या लगभग 18 करोड़ होने की संभावना है। इसलिए यह एक गम्भीर व महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।”
सम्मेलन से निकलेगा समाधान :
उन्होंने कहा कि सरकार भी वृद्धों की देखभाल के लिए वृद्धाश्रम निर्माण आदि जैसे आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा उन्हें विश्वास है कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में इस विषय पर महत्वपूर्ण व सार्थक परिचर्चा होगी। गहन चिंतन–मंथन के बाद अवश्य ही एक ऐसा समाधान निकलेगा जो वृद्धजनो के कल्याणार्थ नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वृद्धों के जीवन में परिवर्तन लाने में मदद करेगा यह सम्मेलन :
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि अनुसंधान अधिकारी, सेंट सी. ट्रैग एंड एल्डरलाइन डॉ. तान्या सेनगुप्ता ने कहा कि, इस सम्मेलन का उद्देश्य वृद्ध आबादी की समस्याओं व उनसे जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना और समाधान खोजना है। यह सम्मेलन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करेगा और वृद्धों के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को समझने में सहायता करेगा।
वृद्धों की देखभाल एक सामूहिक जिम्मेदारी :
इस दौरान सलाहकार चिकित्सक डॉ. ए.के. आदित्य, डॉ. शुभांगी सिंह, एमबीबीएस, एमडी (मनोचिकित्सा), राष्ट्रीय अध्यक्ष, एनएपीसीएएम डॉ. अबलुजीत डैम, आदि ने कहा कि, वृद्धों की देखभाल एक सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें वृद्धों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाने के लिए काम करना होगा। सरकार और समाज को मिलकर वृद्धों के लिए आवश्यक सुविधाएं और सेवाएं प्रदान करनी होंगी। सम्मेलन में सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की डीन डॉ. उषा सिंह, निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह समेत अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
8 विषयगत ट्रैकों पर पोस्टर प्रदर्शित :
सम्मेलन के पहले दिन आठ विषयगत ट्रैकों पर 17 सहकर्मी समीक्षित पोस्टर प्रस्तुतियाँ हुईं। जिनमें मुख्य रूप से वृद्ध जनसंख्या, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और चुनौतियाँ, स्वस्थ वृद्धावस्था और कल्याण, माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 का रखरखाव और कल्याण, कानूनी और वित्तीय सुरक्षा, नीतियाँ और कार्यक्रम, सामाजिक-भावनात्मक कल्याण, वृद्धावस्था पोषण और आहार प्रबंधन, आयुर्वेद की भूमिका, पारंपरिक प्रथाएँ, ध्यान और सजगता और आध्यात्मिकता की भूमिका शामिल थे।
कई वैज्ञानिक व पदाधिकारी थे मौजूद :
कुलसचिव डॉ पी.के. प्रणव, विश्वविद्यालय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ राकेश मणि शर्मा, डॉ शिवपूजन सिंह, एनआईएसडी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, एन.ए.पी.सी.ए.आई.एम, डॉ. अभिजीत के. डैम, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, एचडीएफएस, पूसा, और परिसर के बाहर के वैज्ञानिक और विद्वान समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।