
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “आने वाले समय में कृषि एक व्यवसाय का रूप ले सकता है इसलिए किसानों को अब व्यवसाय प्रबंधन एवं मार्केटिंग की ट्रेनिंग देने की जरूरत है। इसे ध्यान में रखते हुए सब्जियों, फलों एवं अन्य फसलों के प्रोसेसिंग को लेकर भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।”
डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में आयोजित अनुसंधान परिषद की 5 दिवसीय बैठक में समापन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही।
कड़ी समीक्षा के बाद होते हैं प्रभेद जारी :
अनुसंधान और प्रभेद को लेकर उन्होंने कहा कि, “विश्वविद्यालय में किसानों की स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखकर अनुसंधान किये जा रहे हैं। वे नहीं चाहते कि सिर्फ खानापूर्ति के लिए प्रभेद या तकनीक रिलीज कर दिया जाएं, इसलिए विश्वविद्यालय से कोई प्रभेद या तकनीक जारी करने से पहले कड़ी समीक्षा की जा रही है।”
बताते चलें कि, डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में आयोजित 5 दिवसीय अनुसंधान परिषद की बैठक के अंतिम दिन, मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जियां, फूल सहित अन्य विषयों से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
4 दिन सुबह 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक चली बैठक :
इस दौरान कुलपति डॉ पाण्डेय ने कहा कि, “विगत चार दिनों में सुबह दस बजे से रात के नौ -दस बजे तक चली अनुसंधान परिषद की यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि, विश्वविद्यालय देश को 2047 तक विकसित बनाने में अपना अहम योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां के वैज्ञानिक समर्पित भाव से किसानों के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं।”
“उन्होंने बताया कि इस दौरान विश्वविद्यालय ने तीन पॉलिसी पेपर जारी किया है जो, ठोस अनुसंधान एवं डाटाओं पर आधारित है। इस पॉलिसी पेपर के आधार पर सरकार को निर्णय लेने में सहुलियत होगी और किसानों को भी फायदा होगा।”
वैज्ञानिकों को किया प्रेरित :
उन्होंने कहा कि “वैज्ञानिकों को समझना होगा कि वे दुनिया भर में सबसे अधिक प्रतिभाशाली है और उन्हें सबसे बेहतर कर इसे साबित करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का लैब उपलब्ध करवाया है और यदि कहीं कोई कमी है तो उसको प्राथमिकता के आधार पर तुरंत दूर किया जायेगा।”
अतिथि के उद्गार:
बाह्य विशेषज्ञ शेर ए कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय जम्मू एवं श्रीनगर के पूर्व कुलपति डॉ जेपी शर्मा ने कहा कि “इस विश्वविद्यालय में अनुसंधान की जो प्रगति है उसको देखकर दावे के साथ कह सकते हैं कि आने वाले कुछ वर्षों के अंदर विश्वविद्यालय के अनुसंधान पूरी दुनिया को नई राह दिखायेगा। कई अनुसंधान परियोजनाओं से जो जानकारी प्राप्त हो रही है वो क्रांतिकारी हैं।”
निष्कर्ष आने तक गोपनीयता जरूरी:
डॉ शर्मा ने अपने संबोधन में वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि “अनुसंधान से संबंधित जानकारी तब तक साझा न करें जबतक उसका पूरा निष्कर्ष न आ जाए। नहीं तो दुनिया भर में लोग इसकी कापी कर सकते हैं और इससे भारत को और विश्वविद्यालय को नुक़सान होगा।”
निदेशक अनुसंधान का उद्बोधन:
कार्यक्रम के दौरान निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह ने कहा कि “विश्वविद्यालय कृषि में डिजिटल एग्रीकल्चर समेत विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए काम कर रहा है। चल रहे अनुसंधान के निष्कर्ष कुछ वर्षों में आयेंगे और कृषि को नई दिशा देंगे।”
अंत में सह निदेशक अनुसंधान डॉ संतोष ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। बैठक का संचालन डॉ मुकेश कुमार एवं अन्य वैज्ञानिकों ने किया।
मौके पर निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ रत्नेश कुमार झा, निदेशक गन्ना अनुसंधान डॉ देवेन्द्र सिंह, डॉ सीके झा, डॉ महेश कुमार, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।