
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। नर्सरी से खर-पतवार निकालते रहें, खेतों में अधिक से अधिक गोबर से बने कम्पोस्ट का पर्याप्त मात्रा में प्रयोग करें और पशुधन को टीके लगवाएं।
मानसून के बिहार में प्रवेश करने और अच्छी वर्षा की सम्भावना को देखते हुए डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केन्द्र के नोडल ऑफिसर डाॅ अब्दुल सत्तार ने खेतिहर व पशुपालक किसानों केलिए जारी समसामयिक सुझाव में उक्त बातें कही हैं।
उन्होंने कहा है कि, धान का बीज नर्सरी में प्राथमिकता से गिरावें। मध्यम अवधि के लिए संतोष, सीता, सरोज, राजश्री, प्रभात, राजेन्द्र सुवासनी, राजेन्द्र कस्तुरी, राजेन्द्र भगवती, कामिनी, सुगंधा किस्में अनुशंसित है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई हेतु 800-1000 बर्ग मीटर क्षेत्रफल में बीज गिरावें। नर्सरी में क्यारी की चैड़ाई 1.25-1.5 मीटर तथा लम्बाई सुविधानुसार रखें। बीज को 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर बविस्टिन मिलाकर बीजोपचार करें।
10 से 12 दिनो के बीचड़े वाली नर्सरी से खर-पतवार निकालें। धान की पौधशाला में पौधों की ऊपरी पतियाॅ पीली और नीचे की पतियाॅ हरी हो तो यह लौह तत्व की कमी का लक्षण है। इसके लिए 0.5 प्रतिशत फेरस सल्फेट एवं 0.25 प्रतिशत चूने के घोल का छिड़काव करें। पौधशाला में ब्लास्ट तथा भूरा धब्बा रोग का लक्षण दिखने पर बविस्टिन 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल कर आसमान साफ रहने पर छिड़काव करें।
खरीफ मक्का की अनुशंसित किस्में जैसे सुआन, देवकी, शक्तिमान-1, शक्तिमान-2, राजेन्द्र संकर मक्का-3, गंगा-11 की बुआई करें। बीज दर 20 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर रखें। पिछात गरमा मक्का में कीट-व्याधि की निगरानी करें। खरीफ प्याज की नर्सरी (बीजस्थली) गिरावें। एन0-53, एग्रीफाउण्ड र्डाक रेड, अर्का कल्याण, भीमा सुपर खरीफ प्याज के लिए अनुशंसित किस्में है। बीज गिराने के पूर्व बीज को केप्टन या थीरम/2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर बीजोपचार कर लें।
बीज की दर 8-10 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर रखें। पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए 40 प्रतिशत छायादार नेट से 6-7 फीट की ऊचाई पर ढ़क सकते है। प्याज के स्वस्थ पौध के लिए पौधषाला से नियमित रूप से खरपतवार को निकालते रहें।
बरसाती सब्जियाँ जैसे- भिंडी, लौकी, नेनुआ, करैला, खीरा की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें। खेत की जुताई में गोबर की खाद/कम्पोस्ट का अधिक से अधिक प्रयोग करें। खरीफ चारा फसलें मल्टीकट मीठा ज्वार, एम0 पी0 चरी, कोहवा एवं मक्का (अफ्रीकन टौल) की बुआई करें। इन चारा फसलों के साथ दलहनी चारा जैसे मेथ, लोबिया या हाईब्रीड मेथ भी लगायें।
बहुवर्षीय चारा फसलें हाईब्रीड नेपियर, गिनिया घास, अंजन घास लगावें। इस माह में आम, लीची, आदि वृक्षें के लिए खोदे गये गड्ढों में मिट्टी के साथ अनुशंसित मात्रा में खाद, उर्वरक एवं थिमेट दे कर ऊपर तक भरने का कार्य कर लें। पशु चारा के लिए ज्वार, बाजरा तथा मक्का की बुआई करें। इसके साथ मेथ, लोबिया तथा राईस बीन की बुआई करें। पशुओं के प्रमुख रोग एन्थ्रेक्स, ब्लैक क्वार्टर (डकहा) एवं एच0एस0 (गलघोंटू) से बचाव के लिए पशुओं को टीके लगावें।