
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क पूसा । कुलपति डॉ पीएस पांडेय के नेतृत्व में डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा ने देश भर के विश्वविद्यालयों को नई राह दिखाई है। विश्वविद्यालय का दीक्षारंभ कार्यक्रम एक अनूठा कार्यक्रम है जिसमें छात्रों में समग्र व्यक्तित्व विकास के साथ साथ उनमें देश भक्ति और राष्ट्र निर्माण में समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रीय मुल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद एवं राष्ट्रीय प्रत्ययन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ अनिल सहस्रबुद्धि ने विजय दिवस के अवसर पर आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान अपने उद्गर व्यक्त करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि दीक्षारंभ को अब सभी विश्वविद्यालयों में लागू कर दिया गया है लेकिन आवश्यक है कि विश्वविद्यालय इसके मूल भावना को समझें और सिर्फ खानापूर्ति के लिए दीक्षारंभ का आयोजन न करें।
डॉ सहस्रबुद्धि ने कहा कि डॉ पांडेय का नाम दीक्षारंभ के साथ जुड़ गया है और जब भी इसका नाम लिया जायेगा डॉ पांडेय का नाम आयेगा। दीक्षारंभ की संकल्पना देने के लिए देश डॉ पांडेय को हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने डिजिटल एग्रीकल्चर सहित अन्य क्षेत्रों में भी देश को नई राह दिखाई है लेकिन दीक्षारंभ इन सबसे उपर है और अनूठा है।
बताते चलें कि विजय दिवस के अवसर पर वेटरन्स इंडिया संस्थान, भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय प्रत्ययन बोर्ड, एवं भारतीय विश्वविद्यालय संघ के द्वारा संयुक्त रूप से राष्ट्रीयता, देशभक्ति एवं राष्ट्र निर्माण में शिक्षकेत्तर गतिविधियों में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिए डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा को नई दिल्ली में पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया। विवि के कुलपति डाॅ पीएस पाण्डेय ने सम्मान ग्रहण किया।
विदित हो कि यह विजय दिवस 1971 में पाकिस्तान पर भारत की विजय की याद में मनाया जाता है। पुरस्कार केलिए चयनकर्ताओं की टीम में देश के कई प्रख्यात न्यायाधीश, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद एवं प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने सम्मान ग्रहण करते हुए कहा कि इजरायल यात्रा के दौरान उन्होंने दीक्षारंभ के बारे में विचार किया था और तब से वे लगातार इस बारे में सोचते रहे और जब उन्हें कुलपति बनने का मौका मिला तो उसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को इस तरह का सम्मान मिलना गर्व का विषय है। यह सम्मान विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों के कारण ही संभव हो सका है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी लोग जिस टीम भावना से कार्य करते हैं उससे उन्हें और भी अधिक श्रेष्ठ कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। इस उपलब्धि केलिए कुलसचिव डॉ पीके प्रणव, निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह, डीन पीजीसीए डॉ मयंक राय, डीन बेसिक साइंस डॉ अमरेश चंद्रा, निदेशक शिक्षा डाॅ उमाकांत बेहरा, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ रत्नेश झा समेत विभिन्न पदाधिकारियों ने एक दूसरे को बधाई दी।
बताते चलें कि नई दिल्ली में विजय दिवस के अवसर पर इस सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था जिसमें भारत सरकार के रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, देश के कई न्यायाधीश, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।