
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 प्रयागराज। सन् 1926 में स्थापित, भारतीय कला संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन को समर्पित प्रयाग संगीत समिति ने अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे कर लिए। बुधवार को शताब्दी वर्ष समारोह के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय 86वां दीक्षांत समारोह समर्पित संगीत मनीषियों व केंद्राध्यक्षों की बैठक व रंगारंग कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हो गया।
मिथिला कला हो पाठ्यक्रम में शामिल :
इस अवसर पर रजिस्ट्रार द्वारा विषय प्रवेश के पश्चात देश भर से जुटे केंद्राध्यक्षों ने समिति के उत्तरोत्तर विकास की कामना के साथ विभिन्न सुझाव दिए। इसी क्रम में दरभंगा से पधारे स्वर लोक के केंद्राध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश आर्य ने ऐतिहासिक मिथिला चित्रकला के संरक्षण व संवर्धन हेतु पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता जताई।

केंद्राध्यक्ष हुए सम्मानित :
इस दौरान समिति के शतायु होने के उपलक्ष्य में, समिति के सचिव अरुण कुमार, रजिस्ट्रार प्रदीप कुमार, आदि पदाधिकारियों ने 100 वर्षों के सफर के साथी केंद्राध्यक्षों को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया। फिर शुरू हुआ सांगीतिक प्रस्तुतियों का दौर जिसमें संगीत के विभिन्न विधाओं, के साधकों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को घंटो बांधे रखा।
बिहार–झारखंड के कलाकारों ने मन मोहा :
इस दौरान बिहार के मधुबनी से पधारे पंडित रामवृक्ष सिंह के ध्रुपद, हाजीपुर से पधारे पंडित देवानंद यादव, झारखंड के रांची से पधारे गायक पंडित सतीश शर्मा के ख़्याल, भजन आदि, समस्तीपुर के दलसिंहसराय से पधारे श्रीराम पोद्दार के भजन, पटना से पधारी सुविख्यात नृत्यांगना गुरु अंजुला कुमारी द्वारा प्रस्तुत कत्थक नृत्य, दरभंगा से पधारे तबला वादक सुधीर कुमार झा आदि ने उपस्थित लोगों को झूमने पर विवश कर दिया।

समारोह के साक्षी बने कई दिग्गज कलाकार :
मौके पर तिलका मांझी विश्वविद्यालय भागलपुर की संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू पोद्दार, औरंगाबाद के पं. दिनेश पाण्डेय, बेगूसराय से भजनानंद, दरभंगा से पधारे पंडित अमर कुमार झा, समस्तीपुर से आए पंडित त्रिपुरारी झा, सहित सैकड़ो कला मर्मज्ञ मौजूद थे।