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Home » विश्वविद्यालय प्रसार शिक्षा के क्षेत्र में केवीके की भूमिका महत्वपूर्ण : कुलपति,

विश्वविद्यालय प्रसार शिक्षा के क्षेत्र में केवीके की भूमिका महत्वपूर्ण : कुलपति,

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar28/11/2025No Comments3 Mins Read
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उद्घाटन करते वीसी व अन्य।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 डेस्क पूसा । विश्वविद्यालय के कई कृषि विज्ञान केन्द्र देश के शीर्ष दस कृषि विज्ञान केन्द्र शामिल हैं, लेकिन मेरी इच्छा है कि हमारे सभी सोलह केवीके देश शीर्ष 20 कृषि विज्ञान केन्द्र में शामिल हो।

शुक्रवार को डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रसार शिक्षा परिषद की दो दिवसीय नवम बैठक की अध्यक्षता करते हुए विवि के कुलपति डाॅ पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि प्रसार के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को नया माॅडल गढने की आवश्यकता है, ताकि पूरे देश में प्रसार के उस माॅडल का उपयोग हो सके।

बताते चलें कि डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में प्रसार शिक्षा परिषद की दो दिवसीय नवम बैठक का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। परंपरानुसार अतिथियों के स्वागत सम्मान के बाद आगत अतिथियों संग कुलपति डाॅ पीएस पाण्डेय ने दीप प्रज्वलित कर बैठक का विधिवत उद्घाटन किया।

कुलगीत प्रसारण एवं स्वागत संबोधन के बाद बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रसार शिक्षा के क्षेत्र में केवीके का महत्वपूर्ण योगदान है। हालिया संपन्न विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान बहुत सारे किसानों से संबंधित समस्यायें उभर कर आयी है उन सब पर काम करने की आवश्यकता है।

अपने संबोधन में उन्होंने प्रसार के क्षेत्र में वार्षिक लक्ष्य तय करने पर भी जोर दिया और कहा कि तीन महीने में इन लक्ष्यों का स्व मूल्यांकन और छह महीने में विश्वविद्यालय स्तर पर मूल्यांकन होना चाहिए। प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ रत्नेश झा ने विश्वविद्यालय प्रसार के क्षेत्र में चल रहे नवोन्मेषी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए अतिथियों का स्वागत किया।

वहीं मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उपमहानिदेशक प्रसार शिक्षा, डॉ पी दास ने कहा कि पूसा वह धरती है जहां से कृषि शिक्षा और अनुसंधान की शुरुआत हुई। किसानो, कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों केलिए पूसा एक तीर्थस्थल है।

उन्होंने कहा कि प्रसार शिक्षा के तौर तरीके अब काफी पुराने हो गए हैं। नये दौर में समय की मांग के अनुसार मल्टी डिसिप्लिनरी एप्रोच के साथ प्रसार शिक्षा को बदलने और समावेशी बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने अनुसंधान के स्तर पर काफी अच्छा कार्य किया है। उन कार्यो कोे किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। कृषि में कम पानी के प्रयोग और कार्बन फ्री कृषि जैसे अत्याधुनिक तकनीक को लेकर भी प्रसार शिक्षा के माध्यम से किसानों को जागरूक करना होगा।

इस अवसर पर जहां पद्म श्री राजकुमारी देवी उर्फ किसान चाची ने अपने अनुभव और घर की दहलीज से पद्म सम्मान तक के सफर पर विस्तार से चर्चा की वहीं प्रसार शिक्षा परिषद के किसान सदस्यों ने किसानों की समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की।

इस दौरान उपस्थित पूर्व सहायक महानिदेशक डॉ रणधीर कुमार सिंह, प्रगतिशील किसान योगेन्द्र कुमार पाठक एवं प्रगतिशील किसान राघव शरण सिंह मौजूद थे।

मंच संचालन डॉ सौरव त्रिवेदी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनिता सत्पथी ने किया। मौके पर डीन पीजीसीए डा मयंक राय, स्कूल आफ एग्री-बिजनेस एंड रुरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ रामदत्त, डॉ महेश कुमार, डॉ कुमार राज्यवर्धन अटारी पटना के प्रतिनिधि, केवीके के वैज्ञानिक, शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

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Dr Rajendr Prasad Central Agricultural University Pusa DRPCAU Education Extension ICAR Education Extension
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