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Home » 2047 तक विकसित भारत बनाने में होगी कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका अहम: कुलपति,

2047 तक विकसित भारत बनाने में होगी कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका अहम: कुलपति,

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar27/06/2025No Comments3 Mins Read
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संबोधित करते वीसी व अन्य।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

पूसा । डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के विद्यापति सभागार में आयोजित दो दिवसीय 19वीं अनुसंधान परिषद खरीफ 2025 सफलता पूर्वक संपन्न हो गया। इस दौरान कृषि क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों पर आधारित 70 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों की समस्याओं पर आधारित अनुसंधान करने की दिशा में सतत प्रयत्नशील है। वहीं पिछले दो वर्षों में जिन जिन अनुसंधान परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है वे सभी किसानों की प्रत्यक्ष समस्याओं पर आधारित है।

इस क्रम में उन्होंने वैज्ञानिकों को उनके बेहतर कार्यं के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने के प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने में कृषि वैज्ञानिकों की महती भूमिका रहने वाली है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को समझना और विश्वास करना होगा कि वे दुनिया के सबसे बडे कृषि प्रधान देश के तथा पूरी दुनिया के सबसे बेहतरीन कृषि वैज्ञानिक हैं।

उन्होंने कहा कि जब हमारे एटीट्यूड में परिवर्तन आता है तो वह व्यवहार और कार्य में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहा है लेकिन वे चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वविद्यालय अपनी अमिट छाप छोड़ सके।

इस अवसर पर नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ एआर पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले दो वर्षों में ड्रोन तकनीक, फिशरीज, एवं अन्य क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। इस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के शोध पत्र का कई विदेशी वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान में उपयोग किया है, यह गौरव की बात है।

भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ जीपी दीक्षित ने दलहन के क्षेत्र से जुड़े विश्वविद्यालय के अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को अरहर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर आधारित अनुसंधान करना चाहिए। वहीं भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की निदेशक डॉ सी तारा सत्यवती ने कहा कि विश्वविद्यालय में सामा, कोदो सहित अन्य श्री अन्न के जीन से संबंधित चल रहे अनुसंधान आने वाले समय में किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे।

बैठक के बारे में जानकारी देते हुए निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह ने कहा कि दो दिनों तक चले इस अनुसंधान परिषद की बैठक में सत्तर से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं की बाह्य विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की गई। साथ ही ग्यारह नये अनुसंधान परियोजना स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया। जिसमें से चार अनुसंधान परियोजनाओं को विभिन्न बदलावों के साथ अगले बैठक में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।

मंच संचालन डॉ मुकेश कुमार ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ एस के ठाकुर ने किया। मौके पर निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ मयंक राय, डीन बेसिक साइंस डॉ अमरेश चंद्रा, डीन इंजीनियरिंग डॉक्टर राम सुरेश वर्मा, डीन फिशरीज डॉ पी पी श्रीवास्तव, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ राकेश मणि शर्मा, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ महेश कुमार समेत विभिन्न शिक्षक एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे।

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19वीं अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय बैठक डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा
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